280 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय बंबई में अछूतों के लिए समाज केंन्द्र
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर भारतीय समुदाय को सामाजिक समता के रूप में मानव प्रतिष्ठा दिलाने के लिए अछूतों के आंदोलन के लिए धन एकत्र करने के लिए सतत रूप से प्रयत्न कर रहे थे। वे एक केंद्र स्थापित करने की योजना बना रहे थे। ताकि अछूतों की गतिविधियों का कार्यान्वयन और अनुवीक्षण किया जा सके। संभवतः उन्होंने सन् 1949 में भारतीय राजाओं और लोगों से अपील की थी-संपादकगण सेवा में
भारत के राजा और लोग
बंबई में अछूतों के लिए समाज केंद्र
इस योजना के लिए 3,25,000/- रुपये की आवश्यकता है
क्या आप सहायता नहीं करेंगे?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर, एम.ए., पीएच.डी.,
डी.एसपी., बार-एट-लॉ
सदस्य गवर्नर जनरल्स एक्जीक्यूटिव काउंसिल द्वारा
अपील
आज भारत की जनसंख्या के 70 मिलियन अछूतों की पददलित और तिरस्कृत स्थिति भारत की एक प्रमुख समस्या है। प्राचीन काल से बहुत-से हिंदू सुधारकों का ध्यान इन्हें अन्य समुदायों के स्तर तक ले जाने की ओर आकर्षित हुआ है। परंतु यह अनुभव नया ही है कि अछूत अपनी स्थिति में सुधार का दायित्व अपने ऊपर ले रहे हैं। यह समता के लिए उनका अपना संघर्ष है जो केवल 25 वर्ष पूर्व शुरू हुआ है।
यह संघर्ष अनेक अवस्थाओं से गुजरा है और इस आंदोलन को बार-बार अस्वीकृति और निरंतर विरोध के बावजूद ताकत मिली है। जहां तक कि आत्मविश्वास का संदेश निम्नतर स्तरों तक पहुंचा है; पिछड़े एकांत गांवों और सुनसान बस्तियों को उद्धेलित किया है; और निर्जीव घाटियां जहां कभी घोर अंधविश्वास, नितांत आत्म-तिरस्कार और अथाह अज्ञानता का बोल-बाला था। वहां नए जीवन का संचार किया है। एक उचित उत्साह जागा है और वास्तविक आंदोलन का प्रारंभ हुआ है। अछूतों और इस देश दोनों की स्थिति को ऊपर उठाने के लिए अत्यधिक शक्ति का आह्वान किया