70. बंबई में अछूतों के लिए समाज केंन्द्र - Page 301

282 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मेरे बारे में कांग्रेसी हलकों से इस संदर्भ पर निर्भर करना मेरे लिए खुशी की बात है। इससे पता चलता है कि विगत में मैंने अपने आप को मुख्य रूप से सामाजिक कार्य को समर्पित किया है।

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मेरी यह इच्छा है कि जिस महान कार्य का श्री खेर ने संदर्भ दिया है उसे चिरस्थायी आधार पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए और मुझे पक्का विश्वास है कि अछूतों के आंदोलन में रुचि रखने वाले लोगों का भी यही विचार होगा। इसमें वो राय नहीं हो सकती कि यदि आंदोलन को सफल होना है तो उसके पास यह तीन चीजें होनी ही चाहिए (1) एक केंद्रिय मुख्यालय, (2) समर्पित कार्यकताओं का सुप्रशिक्षित समूह, और (3) विŸाय स्थिरता। केवल इन साधनों के साथ आंदोलन को ठोस और स्थायी आधार पर रखा जा सकता है।

इन तीन में से, समाज केंद्र की स्थापना को केंद्रीय मुख्यालय के रूप में अत्यधिक मूलतत्व माना जाना चाहिए। एक बार समाज केंद्र स्थापित हो जाने पर जिस योजना का मैंने निर्माण किया है उसके अर्न्तगत यह आंदोलन को बनाए रखने में सहायता प्रदान करेगा। यह आय का भी स्रोत होगा जिससे सामाजिक गतिविधियों को चलाने और पूर्णकालिक वेतन आधार पर समर्पित कार्यकर्ताओं के समूह को बनाए रखने के लिए व्यय को पूरा किया जा सकेगा।

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असंदिग्ध रूप से कहा जा सकता है कि प्रत्येक प्रांत में अछूतों का समाज केंन्द्र होना आवश्यक है। वास्तव में प्रत्येक प्रांत को यह प्रदान करना मेरी योजना में है। कहीं न कहीं से इसकी शुरुआत की जानी चाहिए और मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि बंबई ही वह स्थान हैं जहां से शुरुआत की जा सकती है। उस आंदोलन का नेतृत्व बंबई ने ही प्रदान किया है। इसलिए यह उपयुक्त ही रहेगा कि पद्धतिबद्ध और स्थायी संगठन की नींव बंबई शहर में ही पड़नी चाहिए। इन कारणों से मैंने शुरुआत करने के लिए बंबई को चुना है। बंबई में समाज केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव जो है न केवल अछूतों के उत्थान के लिए सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक गतिविधियों के मॉडल के लिए उपयोगी होगा बल्कि यह नए विचारों के प्रचार-प्रसार और विभिन्न गतिविधियों को सद्भावपूर्ण समग्रता में समन्वित करने का भी कार्य करेगा।

प्रस्तावित समाज केंन्द्र की योजना की रूप-रेखा इस अपील में बाद में दी गई है। इससे पता चलेगा कि इसमें से सब आवश्यक तत्व दिए गए हैं जो केंद्र को