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अछूतों के लिए लोकप्रिय सैरगाह बनाने के लिए जरुरी हैं-यह पश्चिमी देशों में विद्यमान सामाजिक बस्तियों पर आधारित है- ताकि उनकी प्रथाओं और जीवन के प्रति सामान्य दृष्टिकोण में हितकारी परिवर्तन करके उनके सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन के मानदंड में इजाफा किया जा सके। इससे उनमें मिलजुलकर उद्देश्यों को कार्यशील करने की भावना जागृत होगी और सामाजिक पुनरुद्धार का कार्य स्थायी आधार पर होगा। बंबई शहर में वर्तमान में जो मुख्य गतिविधियां स्वयं अछूत चला रहे हैं उन्हें इस केंद्र से संचालित किया जा सकता है। इस केंद्र के खुल जाने से वह गंभीर बाधा दूर हो जाएगी जो अछूतों की समस्त मुख्य गतिविधियों को एक-स्थान से न चलाने के अभाव में आती है।
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केंद्र का विषय-क्षेत्र और कृत्य पंजीकृत न्यास विलेख द्वारा शासित होगा और निधियों का प्रबंधन न्यासी मंडल द्वारा किया जाएगा।
केंद्र के लक्ष्य और उद्देश्य निम्नलिखित होंगेः-
(क) कष्ट और गरीबी से राहत।
(ख) शिक्षा की प्रगति।
(ग) अत्याचार और अन्याय से राहत।
(घ) नागरिक अधिकारों और विशेषाधिकारों को सुरक्षित और संरक्षित
करना।
(ड.) सामाजिक बुराइयों को खत्म करना।
(च) सामान्य ज्ञान और जागरूकता का प्रसार करना ताकि अंधविश्वासी
प्रथाओं और विश्वासों को सामाप्त किया जा सके।
(छ) सामाजिक और धार्मिक कल्याण को सुरक्षित और विकसित करना।
(ज) सामाजिक और धार्मिक उन्नति के लिए संगठित प्रयत्नों का संवर्धन
करना।
(झ) नागरिक, सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक अशक्तता असुविधा और
भेदभाव को दूर करने के उपायों के लिए विधायी मंजूरी सुरक्षित
करना।
(ञ) अस्पृश्यता हटाना सुरक्षित करना।