12 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पर बनाए रखने के लिए करेंगे, जिन्होंने विधानमण्डल में बहुमत का विश्वास खो दिया है; क्यांकि गवर्नरों को जारी निर्देशों के अन्तर्गत उन्हें सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है जिससे कि वे अपने अधिकारों का प्रयोग करें, ताकि मंत्रिगण अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए, जो वस्तुतः मंत्रियों की ही हैं, अपने विशेष अधिकारों पर निर्भर न रहें। स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है
अभी ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है और गवर्नर की कार्रवाई की आलोचना करने से पहले हमें इंतजार करना और देखना होगा कि वह क्या करते हैं जब इस समय बने हुए मंत्रिगण विधानमण्डल में प्रतिकूल मत के कारण हार जाते हैं। आश्वासन की माँग
बहरहाल, सैद्धांतिक प्रश्न यह है कि क्या कांग्रेस को पद स्वीकार करने से पहले, जो बहुमत में होने के कारण उसकी हकदार है, गवर्नर से अभिवचन की मांग करना न्यायोचित था? कांग्रेसजनों ने यह स्वीकार किया है कि वे कानून में संशोधन नहीं चाहते हैं। कांग्रेस का तर्क है कि उन्हें अपेक्षित अभिवचन गवर्नर द्वारा गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट के प्रावधान को हटाए बिना भी दिया जा सकता था और सवाल यह है कि क्या कानून के प्रावधान को हटाए बिना ऐसा अभिवचन दिया जा सकता है। सम्राट और गर्ववर्नर
श्री भूलाभाई देसाई और सी. राजगोपालाचारी ने कांग्रेस द्वारा तय की गई वैचारिक स्थिति की हिमायत करते हुए यह स्पष्ट किया है कि अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो गवर्नर को अभिवचन देने से रोक सकता हो और यदि गवर्नर ने अभिवचन नहीं दिया तो इसका कारण यही है कि वह ऐसा करना नहीं चाहते।
जिस प्रश्न से हमारा सरोकार है, वह यह है कि क्या गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट ने प्रावधानों को लागू किए बिना गवर्नर के लिए यह संभव है कि वह उनके विशेष अधिकारों को निलंबित रखने के लिए सहमत हो जाएंगे। श्री भूलाभाई देसाई की वैचारिक स्थिति इस विश्वास पर आधारित प्रतीत होती है कि गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट के अन्तर्गत गवर्नर को दिए गए अधिकार और सम्राट के वीटो अधिकार के बीच कोई अन्तर नहीं है। लेकिन मेरा मत यह है कि गवर्नर को वैयक्तिक निर्णय