293 2. परिसंघ की शक्तियां निम्न हैंः
( i ) परिसंघ के लिए संपिŸा का क्रय करना, पट्टे पर लेना या अन्यथा अर्जन
करना और परिसंघ की निधियों का ऐसे ढंग से निवेश और उन पर कार्रवाई
करना जैसा समय-समय पर निर्धारित किया जाए;
( ii ) संघ के प्रयोजनार्थ गृह-वासों, भवनों या निर्माण कार्यों का निर्माण, अनुरक्षण,
पुनर्निर्माण, मरम्मत, परिवर्तन, प्रति-स्थापन या पुनः स्थापना करना;
( iii ) परिसंघ की सभी या किसी संपिŸा को बेचना, निपटाना, सुधारना, प्रबंधन
करना, विकसित करना विनिमय करना, पट्टे पर देना, बंधक रखना या अन्यथा
हस्तांतरित करना या विचार करना;
( iv ) परिसंघ के समस्त या किसी भी प्रयोजन, लक्ष्य और उद्देश्य को कार्यान्वित
करने के लिए प्रतिभूति सहित या उसके बिना रकम जुटाना;
( v ) भारत के किसी भी भाग में परिसंघ को पंजीकृत मान्यता-प्राप्त कराना;
और
(vi) वे सब अन्य विधिपूर्ण चीजें और कार्य करने जो उपर्युक्त किसी लक्ष्य और
उद्देश्य की प्राप्ति के लिए प्रासंगिक या सहायक हों।
| Bu% L | Fkk | uh; |
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| uh; | l | ax | Bu |
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भाग- III
अनुच्छेद- III
- अखिल भारतीय अनुसूचित जाति परिसंघ के अंतर्गत अनुसूचित जातियों को
संगठित करने के प्रयोजनार्थ निम्नलिखित स्थानीय संगठन का गठन किया
जाएगाः
( i ) ग्राम परिसंघ समिति;
(( ii ) ताल्लुका परिसंघ समिति;
( iii ) जिला परिसंघ समिति; और
( iv ) राज्य परिसंघ समिति।