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- केंद्रीय कार्यकारिणी समिति निर्वाचन अधिकरणों के कार्य-संचालन के लिए
नियम बनाएगी। राज्य निर्वाचन अधिकरण भी विनियम बना सकते हैं, जो
कार्य-संचालन के लिए कार्य समिति द्वारा बनाए गए नियमों के विपरीत नहीं
होने चाहिएं। अनुच्छेद-
प्रत्येक राज्य के लिए निर्वाचन अधिकरण होगा।
निर्वाचन क्षेत्र के अंदर कोई भी उम्मीदवार निर्वाचन क्षेत्र में किसी निर्वाचन के
बारे में शिकायत इस संबंध में बने नियमों के अनुसार, राज्य अधिकरण को
ऐसे निर्वाचन के परिणाम घोषित होने के 15 दिनों के भीतर करने के लिए
स्वतंत्र है और जिला निर्वाचन अधिकरण शिकायत पर निर्णय करेगा और
यथाशीघ्र संबंधित पक्षों को अपना निर्णय सूचित करेगा।
- जब तक निर्वाचन अधिकरण द्वारा निर्वाचन रद्द नहीं किया जाता, निर्वाचित
व्यक्ति सम्यक् रूप से निर्वाचित माना जाएगा।
- राज्य निर्वाचन अधिकरण को अपने प्रस्ताव पर या राज्य संघ समिति के
प्रस्ताव पर या संबंधित पक्ष के प्रस्ताव पर, निदेश देने की शक्ति है कि कोई
भी व्यक्ति किसी भी निर्वाचन, रजिस्टर और सदस्यों की सूची के रख-रखाव
जानते हुए झूठी शिकायत या विरोध करने से संबंधित कदाचार का दोषी
पाया जाता है, उसे निर्वाचन में खड़े होने के लिए अयोग्य किया जा सकता
है या संघ से निश्चित अवधि के लिए निकाला जा सकता है।
- जहां कहीं कपटपूर्ण निर्वाचन की रिपोर्ट मिलती है संबंधित समिति ऐसी
शिकायतों की जांच करेगी और जैसा उचित जान पड़े वैसी कार्रवाई
करेगी। अनुच्छेद- XXIV
- राज्य परिसंघ प्रत्येक वर्ष 30 जून के पश्चात् होने वाली प्रथम बैठक में
उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के तीन-चौथाई बहुमत से राज्य
चुनाव अधिकारी नियुक्त करेगा।
- उपर्युक्त के अनुसार यदि कोई राज्य परिसंघ समिति राज्य चुनाव अधिकारी
नियुक्त करने में असफल रहती है तो केंद्रीय कार्यकारिणी समिति राज्य चुनाव
अधिकारी नियुक्त करेगी।