310 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
- संशोधन चाहे परिवर्तन या परिवर्धन से हो, उसे प्रत्येक राज्य में राज्य परिसंघ
समितियों के अध्यक्ष को परिचालित करके इस मामले में उनका निर्णय प्राप्त
करना होगा।
- समितियां इस मामले पर साधारण बहुमत से निर्णय करेंगी।
- राज्य समितियों से निर्णय प्राप्त होने पर अध्यक्ष यह घोषणा करेगा कि संशाधन
स्वीकृत या अस्वीकृत है। भाग- XIII
अनुशासन के नियम
अनुच्छेद- XXVIII
- परिसंघ का कोई सदस्य निम्नलिखित कार्यों में से किसी कार्य को करने पर
अनुशासनहीनता का दोषी माना जाएगाः
( i ) परिसंघ की घोषित नीति के विपरीत कार्य करना।
( ii ) परिसंघ की नीति की खुलेआम आलोचना करना।
( iii ) परिसंघ के किसी भी सदस्य की खुलेआम आलोचना करना ( iv ) परिसंघ के भीतर किसी सदस्य को समर्थन देने के लिए अपना दल इस
आशय से बनाना ताकि परिसंघ के सांविधि रूप से निर्वाचित नेता को चुनौती
दी जा सके।
( v ) किसी सदस्य के विरुद्ध दुर्भावना फैलाना या निंदा का कोई अभियान
चलाना।
( vi ) परिसंघ या परिसंघ के किसी घटक निकाय के कार्य में बाधा डालना। ( vii ) परिसंघ की निधियों का दुरुपयोग करना।
( viii ) परिसंघ द्वारा गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी या दल में शामिल होना। ( ix ) परिसंघ का पदाधिकारी होकर उस पद की शक्तियों का दुरुपयोग करना या
शक्तियों का उपयोग का उपयोग छोड़ देना और उसके द्वारा परिसंघ को
असफल करना।
( x ) ऐसी गतिविधियां शुरू करना जो परिसंघ के लक्ष्यों, उद्देश्यों और शक्तियों के