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बाहर हों।
( xi ) परिसंघ द्वारा किसी चुनाव में खड़े किए गए अधिकृत उम्मीदवार का विरोध
करना।
- कोई भी सदस्य किसी कृत्य के लिए अनुशासनहीनता का दोषी होने पर राज्य
परिसंघ के अध्यक्ष द्वारा दंडनीय होगा जिसके लिए केंद्रीय कार्य-समिति के
अध्यक्ष को अपील की जा सकेगी। केंद्रीय कार्य-समिति का निर्णय अंतिम
होगा।
- अनुशासनहीनता के लिए दंड हो सकता हैः
( i ) परिसंघ से निष्कासन जो स्थायी भी हो सकता है।
( ii ) परिसंघ से कुछ अवधि के लिए निलंबन।
( iii ) कार्यालय से हटाया जाना।
( iv ) पद धारण करने के लिए आयोग्यता लागू करना।
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भाग- XIV
अनुच्छेद- XXIX
अध्यक्ष को यह निर्णय करने की शक्ति होगी कि संविधान के कौन-से अनुच्छेद तत्काल कार्यान्वित किए जाएं।
स्पष्टीकरणः इस भाग में अध्यक्ष का आशय उस व्यक्ति से है जो वर्तमान में परिसंघ का अध्यक्ष है। अनुच्छेद-
अध्यक्ष को किन्हीं कठिनाइयों को दूर करने के प्रयोजनार्थ विशेष रूप से वर्तमान ढांचे से संविधान सम्मत प्रावधानों के अनुरूप संक्रमण के संबंध में यह निदेश देने की शक्ति होगी कि संक्रमण अवधि के दौरान संविधान इस प्रकार के उन रूपांतरों के अधीन प्रभावी रहेगा जो आशोधनों, परिवर्धन या विलोपन के द्वारा किए गए हों, जिन्हें अध्यक्ष आवश्यक या उचित समझता हो। अध्यक्ष की शक्तियों में पदाधिकारियों को हटाने और उनके स्थान पर दूसरों को नामित करने की शक्ति शामिल है।