5. आश्वासन से गवर्नर को कोई नुकसान नहीं न ही कांग्रेस को कोई फायदा - Page 33

14 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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विशेष अधिकारों का त्याग करने की कानूनी असमर्थता वास्तविक है और संवैधानिक कानून, जिसका पालन उनके निर्देश प्रपत्र के अनुसार किया जाना अपेक्षित है, के उल्लंघन के बिना अपने कŸार्व्य का अधित्याग वे नहीं कर सकते थे। यदि सरल शब्दों में कहूँ तो कोई सŸा का त्याग कर सकता है, यदि कोई जवाबदेही न हो, परन्तु यदि जवाबदेही है तो कोई सŸा का त्याग नहीं कर सकता।

मेरे विवेकानुसार विशेष अधिकारों के अस्तित्व को संविधान के कार्यचालन की आपिŸा का ठोस आधार बनाने का आग्रह नहीं किया जा सकता।

महात्मा का तर्क

आश्वासन की मांग हेतु महात्मा गांधी ने सर्वदा भिन्न कारण दिया है। यह आधार इतना अवास्तविक है कि इस बात पर आश्चर्य होता है कि क्या ऐसा कोई व्यक्ति यह कारण दे सकता है जो जानता हो कि संविधान किस प्रकार कार्य करता है। उनका कहना है : मतदाताओं के निर्णायक समर्थन वाली एक मजबूत पार्टी हर समय गवर्नर की इच्छानुसार उसके हस्तक्षेप की भयाक्रांत स्थिति में अपने आपको रखना स्वीकार नहीं कर सकती;’’ जब आत्मसम्मान रखने वाला मंत्री पूर्ण बहुमत के प्रति सचेत हो। कोई यह भी विचार कर सकता है कि क्या अपने मतदाताओं की शक्ति के प्रति सचेत कोई मंत्रिमंडल आश्वासन की विनती के बजाए गवर्नर के विरोध में मैदान में आएगा और अपने अधिकारों का प्रयोग उसके विरुद्ध करेगा। इसमें कोई संदेह नहीं कि यदि कोई अभिवचन आवश्यक है तो केवल एक कमजोर मंत्रिमंडल के लिए है जिसके समर्थन में मतदाताओं की शक्ति नहीं है। कांग्रेस जैसी मजबूत पार्टी के लिए। कोई अभिवचन आवश्यक नहीं है। कांग्रेसजन गवर्नर से सद्व्यवहार के आश्वासन की भीख क्यों मांग रहे हैं। वे उसे तमीज से पेश आने के लिए विवश कर सकते हैं।

गवर्नर आश्वासन दे सकते हैं

क्या गवर्नर कांग्रेस जनों से उस तरह पेश नहीं आ सकते थे जैसे हम शैतान बच्चों को आश्वासन देकर खुश कर देते हैं? वह एआईसीसी का प्रस्ताव पढ़कर और यह जानकर कि वह प्रस्ताव की शर्तों के अनुसार आश्वासन मांग रहे हैं, ऐसा कर सकते थे। मेरा ख्याल है कि यदि ऐसा आश्वासन दे भी दिया जाता, तो कोई नुकसान नहीं होता। मुझे लगता है कि चूंकि कांग्रेस के मंत्रियों ने संविधान के दायरे में रहकर कार्य करने का अभिवचन दिया था और उनके फार्मूले में यह अभिवचन अत्यंत स्पष्ट था, अतः गवर्नरों के लिए एक पारस्परिक अभिवचन देने से इंकार करने का कोई कारण नहीं था कि वे अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग नहीं करेंगे।