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(9) मुद्रण कार्य के निष्पादन के लिए मुद्रणालय या मुद्रणालयों की स्थापना
करना।
(10) सामान्य हित के लिए और सदस्यों की भर्ती के लिए भारत के बौद्धों की
सभाओं और सम्मेलनों का आयोजन करना।
IV महासभा की शक्तियां होंगीः-
(1) महासभा के लिए दान प्राप्त करना और निधियां एकत्रित करना।
(2) भिक्खुओं को रखना।
(3) महासभा के प्रयोजन के लिए महासभा की संपिŸा को बेचना या बंधक
रखना।
(4) संपिŸा का धारण और स्वामित्व।
(5) महासभा के लिए संपिŸा की खरीद करना, पट्टे पर लेना या अन्यथा अर्जित
करना और महासभा के धन का उपयोग ऐसे ढंग से करना जो समय-समय
निर्धारित किया जाए।
(6) महासभा के प्रयोजनार्थ आवासों, भवनों या इमारतों का निर्माण, रख-रखाव,
पुनर्निर्माण, मरम्मत, परिवर्तन, प्रतिस्थापन या पुनः स्थापन करना।
(8) महासभा की समस्त या किसी संपिŸा को बेचना, निपटाना, सुधारना, विकसित
करना, विनिमय, पट्टे पर देना, बंधक रखना या अन्यथा अन्य संक्रामण करना
या कार्रवाई करना।
(8) महासभा या महासभा द्वारा चलाई जा रही या इससे संबंधित किसी संस्था या
संस्थाओं को अन्य किसी संस्था या सोसाइटी के साथ सहयोग, समामेलन,
या संबद्ध करना जिससे महासभा के लक्ष्यों और उद्देश्यों को और आगे बढ़ाया
जा सके।
(9) महासभा के किन्हीं प्रयोजनों लक्ष्यों और उद्देश्यों को क्रियान्वित करने के लिए
प्रतिभूति सहित या इससे रहित धन एकत्र करना।
(10) वे सभी अन्य विधिपूर्ण चीजें और कार्य करना जो उपर्युक्त किन्हीं लक्ष्यों और
उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए प्रासंगिक या सहायक हों।