16 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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यह मात्र पार्टी का कदम है
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न कि कोई राष्ट्रीय प्रयोजन
“बम्बई प्रांतीय विधानमंडल में इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी के नेता डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने स्वयं अपनी और अपने पार्टीजनों की ओर से कांग्रेस पार्टी के नेता श्री बी.जी. खेर को पत्र लिखकर बम्बई के गवर्नर द्वारा मंत्रिमंडल की नियुक्ति का विरोध करते हुए कांग्रेस पार्टी का समर्थन करने से इंकार किया है।
अपने उत्तर में, डॉ अम्बेडकर ने वर्तमान हालात के लिए कांग्रेस पार्टी पर दोषारोपण किया है क्योंकि उनकी पार्टी की राय में गवर्नर से आश्वासन की कांग्रेस की मांग अनावश्यक और असंभव है।
डा.ॅ अम्बेडकर का कहना है कि विधान मंडल का सत्र न बुलाने की गवर्नर की कार्रवाई पर अभी कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। ऐसी कार्रवाई तभी असंवैधानिक होगी यदि सत्र न बुलाए जाने पर छह माह बीत जाते हैं।
अब संविधान के लागू हो जाने के बाद इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी का मानना है कि सभी संवैधानिक साधनों का सहारा ले लेने और उनके असफल होने तक विधान मंडल के सदस्यों द्वारा कोई भी संविधान-बाह्य आन्दोलन नहीं चलाया जाना चाहिए।
डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी ने यह कदम कांग्रेस की स्थिति को न्यायोचित ठहराने के इरादे से और अपनी शक्ति और प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए उठाया है यह मात्र पार्टी द्वारा उठाया गया कदम है। इसका कोई राष्ट्रीय प्रयोजन नहीं है।“ ख्1,
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1 द टाइम्स ऑफ इंडिया, दिनांक 17 मई, 1937
* बिहार प्रांतीय दलित वर्ग लीग, पटना के अध्यक्ष बाबू जगजीवन राम द्वारा डॉ. बी.आर. अम्बेडकर को दिनांक 8 मार्च, 1937 को लिखा गया पत्र परिशिष्ट टप्प्प् में देखा जा सकता है।