77. परिषिष्ट-V पूना सत्याग्रह - Page 361

342 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जलूस लगभग सुबह 10 बजे बाबा जन चौक पर सत्याग्रह कैंप से शुरु होकर चार और पांच की कतारों में चल रहा था। इसका नेतृत्व श्री बी.के. गायकवाड़, अध्यक्ष, बंबई प्रांत अनुसूचित जाति परिसंघ, श्री पी.एन.राजभोज परिसंघ के प्रधान सचिव और श्री आर.आर. भोले, बंबई विधानसभा के पूर्व सदस्य कर रहे थे और युवा लड़कियों और महिलाओं के हाथों में काले झंडे और परिसंघ के झंडे थे जो आगे-आगे चल रही थी। लगभग डेढ़ मील के परिक्रामी पथ की यात्रा करके सुबह लगभग 11 बजे जलूस वार मैमोरियल के निकट सीमा पंक्ति पर पहुंचा।

लाठियों से लैस एक सौ से अधिक पुलिसकर्मी और पुलिस अधिकारी, जिनमें श्री ई.ए.एस.पी., श्री जे. क्रोने. डिप्टी एस.पी. और श्री एफ.डी.र ोख, डिप्टी एस.पी.शामिल थे वहां पर प्रतीक्षा कर रहे थे और तत्काल उन्होंने जलूस को रोका।

प्रदर्शनकारी वहीं पर जमीन पर बैठकर अनुसूचित जाति परिसंघ और अन्य नारे लगाने लगे। इस प्रकार लगभग दो घंटे वहां रहने के पश्चात् उन्होंने कैंप में वापस लौटने का निर्णय किया और बैलेजली रोड से होते हुए सत्याग्रह कैंप में वापस आ गए।

प्रदर्शन कारियों ने कैंप वापस लौटने पर बैठक की और पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों को बधाई दी।

श्री पी.एन. राजभोज ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि उनके स्वतंत्रता संघर्ष की आज षुरुआत हो गई है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जातियां पूर्णतः जागरुक हैं और अपना लक्ष्य प्राप्त करके ही वे अब चैन से बैठेंगी। आजका सत्याग्रह देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत है।

श्री बी.के. गायकवाड़ ने घोषणा की कि सत्याग्रहियों का जलूस अब कल निकाला जाएगा और तत्पश्चात् ये प्रत्येक दिन निकलेगा।

पूना के जिला मजिस्ट्रेट ने आज एक आदेश जारी करके पूना नगरपालिका, पूना, पूना उपनगरपालिका और पूना छावनी बोर्ड के अधीन क्षेत्रों में लाठियों, चाकूओं, पत्थरों या कोई अन्य अस्त्रों को पास रखने पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश 15 जुलाई से सात दिन के लिए लागू रहेगा।

ऐसा समझा जाता है कि उपर्युक्त एहतियात इसलिए जी गई है ताकि अनुसूचित जाति परिसंघ के सत्याग्रह आंदोलन के कारण किसी अप्रिय घटना और शंति और व्यवस्था-भंग से बचा जा सके।

1 जय भीम, अगस्त, 13, 1946 पृष्ठ 7