80. नागपुर सत्याग्रह - Page 370

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तीन नेताओं यथा दादा साहेब फुल्लीदासजी, अनु.जा.परि.के कार्य-समिति सदस्य और नगर आयुक्त, कानपुर, श्रीमती फुल्लीदास और श्री तोताराम, अध्यक्ष, अनु.जा.परि. के साथ 148 सत्यग्राही गिरफ्तार किए गए थे। महिला सत्याग्रहियों ने सभा चैम्बर में घुसकर 15 मिनट के लिए सभा की कार्यवाही को चलाना असंभव कर दिया। महिलाओं का अपमान किया गया और सवर्ण हिंदू पुलिस ने उन्हें घूंसे मारकर बाहर निकालने की कोशिश की और इस प्रकार महिलाओं की चूडि़यां टूट गई। गुस्साई महिला सत्याग्रहियों ने कुछ घुसपैठियों को थप्पड़ मार दिए जो उनका अपमान कर रहे थे। महिलाएं अपने बच्चों को गोद में लेकर सत्याग्रह के लिए गई थीं। यह समाचार लखनऊ सवर्ण हिंदू समाचार-पत्रों में पूर्ण रुप से अप्रकाशित हुआ। इस संघर्ष में दो महिलाओं को चोट पहुंची।

श्री राजभोज ने सत्याग्राहियों को संबोधित किया।

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उŸार प्रदेश अनुसूचित जाति परिसंघ के सत्याग्रह का यह चौदहवां दिन था। एक सौ व्यक्तियों का एक बड़ा दल जिसमें झांसी, आगरा हमीरपुर और लखनऊ जिलों के लोग और बीस महिलाएं सत्याग्रही थीं, जिन्होंने गोद में बच्चे ले रखे थे, गिरफ्तारियां दी। परिषद् भवन की ओर जाते हुए, सत्याग्राहियों को हुसैन गंज में रोका गया और बाद में वे गिरफ्तार किए गए थे।

सत्याग्रह के शुरु होने से पहले सत्याग्रहियों को अखिल भारतीय अनुसूचित जाति परिसंघ के प्रधान सचिव ने सत्याग्रह कैंप, अहियागंज में यू.पी.एस.सी. परिसंघ के अध्यक्ष श्री तिलकचंद कुरील की अध्यक्षता में संबोधित किया। प्रधान सचिव ने अपने भाशण के दौरान सवर्ण हिंदुओं द्वारा किए गए उन सामाजिक अन्यायों की दयनीय ओर हृदयविदारक कहानियों को बताया जो वे सवर्ण-हिंदू कांग्रेस मंत्रिमंडल की शह पर हिंदू गांवों में बेगुनाह और सदियों से प्रताडि़त अनुसूचित जातियों के लोगों पर कर रहे हैं। इमानवीय अत्याचारों के उदाहरण देकर उन्होंने श्रोताओं को बताया कि अलीगढ़ जिले में चार व्यक्तियों को जला डाला, मेरठ जिले में 12 निर्धन अनुसूचित जातियों के लोगों को गोली मारदी और हरदोई और जलवान जिलों में बहुत से मकानों को आग लगा दी। कोई भी ऐसा दिन नहीं बीतता जब कि स्वर्ण हिंदुओं द्वारा इन बदनसीब अनुसूचित जातियों के लोगों का मारा-पीटा या हत्या नहीं की जाती। फिर भी अछूतों के विधान सभा सदस्य, जो अपने समुदाय के लोगों के प्रतिनिधि हैं, सभा में इस संबंध में कोई आवाज़ नहीं उठाते। उनकी जबान हमेशा के लिए बंद कर दी गई है कैसे अछूतों जैसा गुलाम अपने हिंदू मालिकों के सामने