80. नागपुर सत्याग्रह - Page 371

352 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उनके अत्याचारों के विरुद्ध बोल सकता है? उनके मुंह से निकली कोई भी बात उन्हें बाहृमण-स्वर्ग में स्थान पाने से वंचित कर सकती है। विधान सभा सदस्यों की संख्या 20 है। तब भी सवर्ण हिंदुओं के अमानवीय अत्याचारों के विरुद्ध कोई आवाज़ नहीं उठाता। वक्ता ने आगे कहा, हाल में ही अनुसूचित जातियों की महिला प्रदर्शनकारियों को हिंदू कांग्रेस मंत्रिमंडल पुलिस द्वारा अपमानित और फेंक दिया गया था। उनमें से कुछ घायल हो गई थीं। तब भी सवर्ण-हिंदू समाचारपत्रों में कोई समाचार नहीं आया। उच्च अधिकारियों द्वारा उपराधियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पददलित समुदाय के किसी विधान सभा सदस्य ने सभा में काम रोको प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया। यह सब पूना पैक्ट का नतीजा था, जिसने उन अनुसूचित जातियों को पृथक निर्वाचन क्षेत्र प्रणाली के स्थान पर संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र प्रणाली प्रदान की, जिन्होंने 1932 में महात्मा गांधी को उनके हानिकर आमरण अनशन से बचाया था। समय बड़ा बलवान होता है। शिक्षित विश्व के समक्ष यह न्याय को प्रमाणित कर देगा। यदि इसी पुलिस द्वारा किसी सवर्ण-हिंदू महिला पर हमला किया जाता तो सवर्ण-हिंदू समाचार-पत्र हंगामा मचा देते और जमीन आसमान एक कर देते।

उŸार प्रदेश में अनुसूचित जातियों के लोगों की जनसंख्या 33 प्रतिशत से अधिक है। अनुसूचित जातियों के लोगों का उŸार प्रदेश में सरकारी नौकरियों में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। कार्यपालिका, न्यायपालिका और शैक्षिक विभागों में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। भारत में अनुसूचित जातियों की स्थिति अमेरिका में हब्शियों और जर्मनी और फिलस्तीन में यहूदियों की स्थिति से बदतर है। यह प्रश्न केवल थोड़े से लोगों से जुड़ा नहीं है बल्कि भारत में करोड़ों अछूतों से जुड़ा हुआ है। अपना भाषण समाप्त करते हुए उन्होंने डॉ. अम्बेडकर के संदेश को उद्धत किया। उन्होंने जनता को समझाया कि अनुसूचित जातियों को यह संकल्प लेना चाहिए कि भावी स्वतंत्र भारत में वे शासक जाति होगी। उन्हें चापलूसी की भूमिका निभाने के लिए मना करना चाहिए या ऐसी स्थिति स्वीकार नहीं करनी चाहिए जिसमें वे स्वामी के सेवक के रुप में माने जाएं।

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अप्रैल 18, 1947

आज सत्यग्रह का पंद्रहवां दिन था। बाज श्री राजभोज, प्रधान सचिव, अखिल भारतीय अनुसूचित जाति परिसंघ ने आगरा, अलीगढ़, कानपुर, टूंडला और लखनऊ से आए पिचहŸार सत्याग्राहियों के साथ गिरफ्तारी दी। मुख्य प्रमुख श्री तिलकचंद कुरील की पिछली रात सत्याग्रह कैंप पर सरकार द्वारा गिरफ्तार ने लखनऊ और पूरे प्रांत में अनुसूचित जातियों के लोगों को प्रोत्साहित किया। सैंकड़ों