80. नागपुर सत्याग्रह - Page 372

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व्यक्ति लखनऊ में परिषद् भवन के सामने गिरफ्तारी देने के लिए आ रहे हैं। यहां तक कि महिलाएं भी पुरुष सत्याग्राहियों से पीछे नहीं है। ऐसे दृष्टांत सामने आए हैं जिनमें अछूत माताएं अपने बेटों को और बहनें अपने भाईयों को गिरफ्तारियां देने के लिए भेज रही हैं।

गिरफ्तारी से पहले श्री राजभोज ने कानपुर के बदलूराम सोनकर को लखनऊ में उŸार प्रदेश के सत्याग्रह का दूसरा प्रमुख नियुक्त किया।

परिषद् भवन के सामने गिरफ्तारी देने जाने से पहले, उन्होंने विशेष रुप से उŸार प्रदेश और सामान्य रुप से समस्त भारत के अनुसूचित जातियों के लोगों को निम्न संदेश दिया।

“ मैं यह कह सकता हूं कि हिंदुओं द्वारा धर्म-जाति आदि के नाम से जो अत्याचार अनुसूचित जातियों पर किए गए हैं वे कॉलोनाइजरों द्वारा आस्ट्रेलियाई बुशमैन पर क्लू क्लक्स क्लान द्वारा नीग्रों पर और नाजियों द्वारा यहूदियों पर किए गए घोर अत्याचारों से अधिक हैं। यह कुछ नहीं बल्कि हमारे लिए चिरकारी विशाक्तीकरण है।

क्या हमें अब यह स्पश्ट हो गया है कि भविश्य में प्रत्येक चीज़ के लिए हमें अपनी शक्ति, संसाधनों और हिम्मत पर निर्भर करना होगा? हमें अपनी लड़ाई अकेले ही लड़नी है, प्रायः यह मामला अनुसूचित जातियां बनाम शेष जातियां हो सकता है। हमने बार-बार कहा लेकिन यह हमें दिया नहीं गया। हमने बार-बार खटखटाया पर दरवाज़ा खोला नहीं गया। षायद हमें तोड़कर दरवाज़ा खोलना पड़ेगा और जो कुछ हम चाहते हैं और हमारा हक है उसे प्राप्त करना होगा। इस प्रकार मैं अपने लोगों के लिए पहले से अत्यधिक कठिनाईयों का अनुमान लगा रहा हूं।

इसका सामना करने के लिए हमें एकमत और एक स्वर से संगठित और मजबूत होना चाहिए। मैं अपने सभी बंधुओं से अपील करता हूं, यहां तक कि उनसे भी जो हमसे दूर रहते हैं, कि एक छत के नीचे आकर, एक आवाज़ में अपनी मांग करें और एक ही झंडे के पीछे चलकर साथ-साथ लड़े।

लेकिन हमें अवश्य ही संगठित होकर मिलकर काम करना है। हमें अवश्य ही लड़ना है और हम लड़ेगे, पूर्णरुप से सिद्धांतों के लिए, खतरों से और हर उस व्यक्ति से जो हमारे रास्ते में आएगा। वर्तमान में उŸार प्रदेश में चल रहा संघर्ष भारत में भारत में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में समान मानव अधिकारों के लिए है। उŸार प्रदेश के अनुसूचित जाति परिसंघ के सत्याग्रह में भागीदारी करने का मेरा कोई विचार नहीं था लेकिन हिंदू-कांग्रेस मंत्रिमंडल के समक्ष हमारी महिलाओं के