354 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
साथ अमानवीय व्यवहार और अपमान ने मुझे इस पवित्र संघर्ष में भागीदारी करने के लिए मजबूर कर दिया है। जब तक इस अपमान का बदला नहीं ले लिया जाता अनुसूचित जातियों का कोई भी व्यक्ति चुन नहीं बैठेगा। अब समय आ गया है कि मान्यवर डॉ. अम्बेडकर के नेतृत्व में या तो हम अपने अंतिम लक्ष्य को प्राप्त करने में अपनी दें या वह करें जो हम कर सकते हैं। मैं सत्याग्राहियों से अपील करता हूं कि वे अपनी कार्यवाहियों को अहिंसक रुप में अंजाम दें।
अंत में, मैं उ.प्र.अनु.जा.परि. को छोड़कर अपील करता हूं कि वे इस सत्याग्रह में लखनऊ कोई दल न भेजें क्योंकि यह सत्याग्रह उŸार प्रदेश विधान सभा के वर्तमान सत्र तक ही चलेगा। उ.प्र.अनु.जा.परि. अकेला ही सत्याग्रह को चलाने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
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अप्रैल 9, 1947
का 16वां
दिन
विभिन्न भागों से चार दलों ने गिरफ्तारियां दी। पहला और दूसरा दल झंडा पार्क और अमीनाबाद में गिरफ्तार किया गया। तीसरा और चौथा दल, जिसमें 4 महिलाएं शामिल थीं, केसरबाग के निकट गिरफ्तार किया गया। दलों का नेतृत्व सर्वधी जौहरी लाल, सेवा राम, गोपीचंद, बीजीपत रामजी बस्ती कर रहे थें। हरिजन मंत्री श्री गिरधारी लाल ने नगर मजिस्ट्रेट के साथ सत्याग्राहियों को सत्याग्रह रोकने के लिए समझाया लकिन शीघ्र ही उन्हें मालूम पड़ गया कि उनके समुदाय के लोगों ने उनकी इस बारे में कितनी इज्जत की ” ।
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उŸार
में
जारी
प्रदेश
21 अप्रैल, 1947
आज सत्याग्रह का 27वां दिन है और अब तक 1285 सत्याग्राही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। सत्याग्रही प्रांत के विभिन्न प्रांत के भिन्न प्रांतों में आ रहे हैं, इनमें आगरा, अलीगढ़ और कानपुर से मुख्य हैं।
आगरा के केसरलाल के नेतृत्व में 35 सत्याग्राहियों का पहला दल चौक बाज़ार के पास गिरफ्तार किया गया। इस दल में 17 महिलाएं भी थीं। जब सत्याग्राही चौक बाज़ार पहुंचे पुलिसवाले की संख्या सत्याग्रहियों से अधिक थी, उन्होंने अहिंसक और शांतिपूर्ण सत्याग्रहियों पर लाठियां चलाई, जिसके फलस्वरुप प्रमुख श्री केसर लाल