80. नागपुर सत्याग्रह - Page 374

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अपनी पुत्री के साथ गंभीर रुप से घायल हो गए। एक और सत्याग्रही श्री बाबूलाल के सिर में गंभीर चोट आई और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर गया। पुलिस उसे वहां से उठाकर उसी स्थिति में निकट के पुलिस स्टेशन ले गई। सर्वदानंदजी के नेतष्त्व में 46 व्यक्तियों का दूसरा दल कैसर बाग के निकट गिरफ्तार किया गया 25-25 का तीसरा और चौथा दल अमीनाबाद के पास गिरफ्तार किया गया था। इन दलों का नेतष्त्व श्री दल लॉतुचे रोड के निकट गिरफ्तार किया गया था जिसका नेतष्त्व आगरा के श्री वालचंद जी कर रहे थे।

अनुसूचित जातियों के लोगों पर पुलिस द्वारा की गई लाठी चार्ज पर अत्यधिक नाराजगी है।

श्री राजभोज, प्रधान सचिव, अखिल भारतीय अनुसूचित जाति परिसंघ, श्री तिलकचंद कुरील, अध्यक्ष, उŸार प्रदेश अनुसूचित जाति

परिसंघ और आगरा के श्री गोपीचंद और कानपुर के श्री फुल्लीदास जैसे अन्य नेताओं के साथ बदसलूकी और उन्हें सी-क्लास में रखने के समाचार ने प्रांत के अछूतों के बीच नाराजगी और उŸोजना पैदा कर दी। अछूत अब उस भावी राम राज्य की कल्पना कर रहे हैं जिसमें वे सवर्ण हिंदुओं के वास्तविक गुलाम होंगे।

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अप्रैल, 22, 1947

चौक के पास कल पुलिस द्वारा लाठियां बरसाने पर आज अनुसूचित जातियों के बीच अत्यधिक उŸोजना है। आज विधान सभा तीन दिन के स्थगन के बाद फिर खुली थी। शहर में प्रदर्शन के बजाय अनुसूचित जातियों के सत्याग्रहियों ने परिषद् सभा के सामने प्रदर्शन किया। कानपुर के श्री जोधाराम के नेतृत्व में 30 लोगों के प्रथम दल को, जिसमें 7 महिलाएं थीं, रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया गया था। आगरा के श्री हरिनंदजी के नेतृत्व में 32 व्यक्तियों के दूसरे दल को परिषद् सभा के सामने गिरफ्तार किया गया। 40 सत्याग्रहियों वाला तीसरा दल, जिसमें 4 महिलाएं थीं, को हजरतगंज के निकट गिरफ्तार किया गया। सत्याग्रहियों के प्रमुख नारे निम्न थेः-

  1. सवर्ण-हिंदू कांग्रेस मुर्दाबाद।

  2. बेगार पद्धति मुर्दाबाद।

  3. करो या मरो पृथक निर्वाचन क्षेत्र चाहिएं।

  4. पंत मंत्रिमंडल मुर्दाबाद।

1 जयभीम, 27 अप्रैल, 1947 पृष्ठ 1 और 7