356 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
- उ.प्र.विधान सभा हरिजन सदस्य मुर्दाबाद।
यह अत्यधिक आश्चर्यजनक है कि हमारे सत्याग्रह आंदोलन की खबर सवर्ण-हिंदू प्रेस ने प्रकाशित नहीं की। श्री राजभोज, प्रधान सचिव, अखिल भारतीय अनुसूचित जाति परिसंघ द्वारा गिरफ्तारी से पूर्व जारी कथन भी प्रकाशित नहीं किया गया था। सभी नेताओं की सी-क्लास में रखा गया है। यहां तक कि उन्हें समाचार-पत्र पढ़ने की भी अनुमति नहीं है। सवर्ण-हिंदू समाचार पत्रों को यह समझ लेना चाहिए कि वे अपने समाचार-पत्रों में खबर प्रकाशित न करके अनुसूचित जातियों की भावना का दमन नहीं कर सकते। ऐसा करके वे केवल स्वयं का और अपने लोगों को धोखा दे रहे हैं। षीघ्र ही ऐसा दिन आने वाला है जबकि सामान्य हिंदू, समस्त भारत में अनुसूचित जातियों के लोगों के बीच अत्याधिक कटु जागरुकता देखकर बहुत उलझन में पड़ जाएगा।
आज तक गिरफ्तारियों की कुल संख्या 1387 है। आज 102 गिरफ्तारियां की गई।
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सत्याग्रह
पी.एन. राजभोज
को
मास
के
कठोर
कारावास
की
सजा
श्री
छह
शनिवार
श्री पी.एन. राजभोज, प्रधान सचिव, अखिल भारतीय अनुसूचित जाति परिसंघ को कल दोशी ठहराकर, श्री बी.डी. सांवल, नगर गजिस्ट्रेट के आदेश का उल्लघंन करने पर छह माह की कैद की सजा दी।
एक और अनुसूचित जाति नेता श्री गोपीचंद पीपल को इसी आरोप पर माह की कठोर कारावास की सजा दी गई।
श्री तिलक चंद कुरील, अध्यक्ष, उ.प्र. अनुसूचित जाति परिसंघ को मजिस्ट्रेट ने छह माह के लिए शांति बनाए रखने के लिए पांच-पांच सौ रुपए की दो जमानतें देने का निर्देश दिया।
“ मजिस्ट्रेट ने लगभग उन 60 महिलाओं और बच्चों को चेतावनी के साथ रिहा कर दिया जिन्हें लखनऊ में सत्याग्रह के संबंध में गिरफ्तार किया गया था-ए.पी. आई. ” ।
1 जयभीम, 4 मई, 1947 पृष्ठ 2