81. परिशिष्ट-VI पूना पैक्ट लादकर गांधी ने अछूतों का मताधिकार-से वंचित किया ब्रिटिश नेताओं ने गांधीवादी दांवपेजों की कटु आलोचना की - Page 378

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जाएंगे उन्हें नई षासन प्रणाली स्वतंत्र और उपयुक्त अवसर तथा खुशी मिलेगी।

“ लेकिन मुसलमानों, खेतिहरों के बीच अल्पसंख्यकों के ऐसे बहुत-से अन्य वर्ग हैं जो राजनीतिक जीवन में न तो घुलते-मिलते हैं और न ही राजनीति में सक्रिय भाग लेते, परंतु जिनके विचार कभी-कभी उन लोगों से नहीं मिलते जो मंचों पर

खड़े होकर उन लोगों की दुहाई देते हैं।

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‘‘12 नवम्बर, 1933 को हाउस ऑफ लॉर्डस की रॉयल गैलरी में गोल मेज सम्मेलन के उद्धघाटन के अवसर पर राजा के भाषण में निम्न उदाहरण थाः

“ मुझे उन बहुसंख्यकों और अल्पसंख्यकों, पुरुषों और महिलाओं शहर वासियों और किसानों, जमींदारों और काश्तकारों, शक्तिशाली और कमज़ोर, धनी और निर्धन, प्रजातियों, जातियों और संप्रदायों के न्यायोचित अधिकारों का ध्यान है जिनसे देश बना होता है। मैं इन बातों के लिए गभीर रुप से चिंता करता हूं ” ।

“ श्री बटलर ने निष्कर्ष कहा इन लोगों और इन चीजों के लिए हम गंभीर रुप से चिंता करते हैं। वे हमारी प्रत्यक्ष देखभाल से बाहर जा रहे हैं। इस अवसर पर हम भावुक हैं और हम उन्हें शुभकामनाएं देते हैं जो सरकार का उŸारदायित्व और भारतीय लोगों के कल्याण की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं ” ।

1 जयभीम, 23 जुलाई, 1947