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“ हम अब अपने दायित्वों से पीछा नहीं छुड़ा सकते। वे रहेंगे और उनका उपयुक्त निर्वाह करने पर भारतीय लोगों की भावी सुख-शांति निर्भर करती है ”, श्री बटलर ने यह कहते हुए अपना भाशण समाप्त किया।
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उŸार
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श्री ए.वी. एलेक्वेंडर, मनोनीत रक्षा मंत्री ने बहस का उŸार देते हुए कहा, कि यह बहस भारत और उसके लोगों के साथ-साथ ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के इतिहास में अत्यंत निर्णायक समय पर हो रही है। उन्होंने भारत में समस्त पार्टीयों के जिम्मेवार नेताओं से कहा कि वे इस बात पर ध्यान दें कि बहस में भाग लेने वाले वक्ताओं के अधिकांश बहुमत ने यही इच्छा व्यक्त की है कि वे यह चाहते हैं कि भारत अपनी स्वतंत्रता सभी संबंधित पक्षों के सदभाव और सहयोग के आधार पर प्राप्त करे।
श्री चर्चिल के इस प्रष्न का उŸार देते हुए क्या दलित वर्गों का पृथक राजनीतिक सŸा के समान मानने की सरकार की नीति है, श्री एलेक्जेंडर ने कहा कि 1935 के अधिनियम से दलित वर्गों को पष्थक राजनीतिक सŸा के रुप में माना गया है और नई सभा में उन्हें इस प्रकार का पृथक्करण दिया जाएगा या नहीं यह विषय संविधान सभा पर निर्भर करता है। उन्होंने घोषित किया कि सरकार यह वांछनीय या दलित वर्गों के हितों में नहीं समझती कि वे इस विषय में सभा पर प्रभाव डालने की कोशि करें। उनका विचार यह है कि अल्पसंख्यक तत्वों के अधिकारों के लिए सुरक्षा प्रदान करने का उचित तरीका यह है कि इस संबंध में इस विधान में प्रावधान किए जाएं।
उन्होंने सदन को याद दिलाते हुए बताया कि केबिनेट मिशन ने कहा था कि जब संविधान सभा अपना कार्य पूरा कर लेगी तो ब्रिटिश सरकार संसद से सिफारिश करेगी कि वह दो विषयों के अधीन नए संविधान को लागू करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करे। उनमें से एक विशय अल्पसंख्यकों के संरक्षण के लिए पर्याप्त प्रावधान का है। दोनों प्रमुख दलों ने संविधान में उचित संरक्षण के प्रावधान करने के अपने इरादे को घोषित कर दिया है और सरकार को किसी प्रकार का संदेह नहीं है कि संविधान सभा ऐसा करेगी।
श्री एलेक्जेंडर ने कहा कि वे श्री हृयूग मोल्सन (अनुदारवादी) से सहमत हैं कि यह सरकार का इरादा है कि अल्पसंख्यकों के संरक्षण के लिए संविधान में अवश्य प्रावधान किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहाः “ मैं समझता हूं कि