20 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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स्ांघीय ढ़ांचे के विरुद्ध लामबंदी
राष्ट्र के इतिहास में मोड़
बम्बई, 20 जुलाई 1938
“संघीय व्यवस्था एक ऐसा मुद्दा है जिस पर देश के सभी प्रगतिशील लोगों द्वारा अपनी पूरी ताकत लगाई जानी चाहिए, चाहे वे किसी भी पार्टी के हों, ताकि देश का भविष्य खतरे में न पडे़“।
संघीय व्यवस्था और इस पर उनकी पार्टी के दृष्टिकोण संबंधी मौजूदा विवाद के बारे में “यूनाइटेड प्रेस“ को दिए गए बयान में इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी ऑफ बॉम्बे के नेता डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने कहा “यह एक निर्णायक क्षण है और सबसे सर्वोच्च त्याग की मांग करता है।“ कांग्रेस और संघ
डॉ. अम्बेडकर ने अपना बयान जारी रखते हुए कहा “इस समय देश में राष्ट्रीय महत्व का सबसे बड़ा राजनैतिक मुद्दा गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट, 1935 में निहित संघीय योजना को स्वीकार करना अथवा अस्वीकार करना है। ब्रिटिश सरकार के नुमाइन्दे जितनी जल्दी हो सके संघीय व्यवस्था को लागू करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। जाहिर है कि पूरा देश गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट के उस हिस्से के विरोध में है जो संघीय व्यवस्था से संबंधित है। तथापि, विपक्ष में इस मुद्दे पर विभिन्न मत हैं और यहाँ तक कि काँग्रेस पार्टी जो संघीय योजना को अस्वीकार करने के लिए प्रतिबद्ध व्यवहार में संघीय ढांचे की पद्धति के प्रति कांग्रेस को क्या दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, इस बात को लेकर मतभेद है। ऐसा विश्वास करने के भी कारण हैं कि कांग्रेस के अधिकांश वयोवृद्ध नेता भी अपने विरोध को लेकर इतने अडि़यल नहीं हैं जितना कुछ लोग इस विषय पर कांग्रेस के मंच पर पारित प्रस्ताव की भाषा से समझते हैं और उन नेताआें में से कुछेक तो संघीय व्यवस्था लागू करने का हार्दिक स्वागत भी करेंगे।