85. परिशिष्ट-X - Page 393

374 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

'kkfey gksus ckYduhdj.k Col2 Col3
kYd h j.
परिशिष्ट- X

अम्बेडकर ने राज्यों से भारतीय संघ में शामिल होने के लिए अनुरोध किया

हैदराबाद प्रस्ताव विभाजन द्वारा फ्रूट बाल्कनीकरण की ओर कदम होगा

बंबई, 17 जून, 1947 ए.पी.आई.

“ भारतीय राज्यों के पास अपने आपको परमोच्च शक्ति से है। वाइसराय कार्यकारी परिषद् के पूर्व सदस्य और प्रमुख संविधान अधिवक्ता डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने कुछेक भारतीय राज्यों द्वारा अधीनता घोषणा के विरोध में दो हजार शब्दों के अपने वक्तव्य में कहा कि यह तभी संभव है जब भारतीय राज्य संघटक ईकाइयों के रुप में भारतीय संघ में शामिल हो जाएं।

डॉ. अम्बेडकर ने घोषणा की कि राज्यों को यह अनुभव करना चाहिए कि प्रभुता संपन्न राज्यों के रुप में उनके अस्तित्व के लिए यह समझौता पांच वर्ष के भी योग्य नहीं होगा।यह राजाओं के हितों में होगा कि वे भारतीय संघ में शामिल होकर संविधानिक राजा बन जाएं।

डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि स्वतंत्र रहकर और संयुक्त राष्ट्र संघ से मान्यता और संरक्षण की आशा करना ख्याली पुलाव बनाने के समान है। डॉ. अम्बेडकर को शक है कि संयुक्त राष्ट्र संघ भारतीय राज्यों पर भारत के अधिराजत्व के दावे की अवहेलना कर उनको मान्यता प्रदान करेगा।

डॉ. अम्बेडकर ने दृढ़ता से कहा कि यदि ऐसा होता भी है तो संयुक्त राष्ट्र संघ भारतीय राज्यों को बाहृय आक्रमण या आंतरिक अशांति के विरुद्ध कोई सहायता तब तक प्रदान नहीं करेगा जब तक कि राज्य उŸारदायी सरकारों का गठन नहीं कर लेते।

निष्कर्षतः डॉ. अम्बेडकर ने कहा, “ भारतीय राज्यों की पसंद चाहे कुछ भी हो भारत के लोगों का दायित्व स्पृष्ट है। उनकी ओर से अंतरिम सरकार को महामहिम सरकार को अधिसूचित करना चाहिए कि ब्रिटिश संसद को परमोच्च शक्ति को रद्द करने का नियम पारित करने का कोई अधिकार नहीं है और आगामी विधान में भारत