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एवं उप-मण्डल मजिस्ट्रेट के मुफस्फिल न्यायालय में प्रैक्टिस करने वालों की आँख का काँटा बन जाते हैं। यह तो वकील (अपीलीय क्षेत्र) एवं वकील ओ. एस. (मूल क्षेत्र) हैं जो केवल जिला न्यायालय एवं उच्च न्यायालय में प्रेक्टिस करते हैं। प्रैक्टिस में व्यावसायिक कार्यकलापों पर अपना दृष्टिकोण केन्द्रित करने पर यह नहीं कहा जा सकता कि कानूनी शिक्षा की प्रणाली में कोई गंभीर कमियाँ है। यह सत्य है कि प्रणाली जटिल एवं अव्यवस्थित है, लेकिन केवल जटिलता एवं असंगतता को एक समस्या उत्पन्न करने वाले तत्व के रूप में नहीं लिया जा सकता, विशेषकर जब गुरूत्वाकर्षण के सिद्धान्त के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति उस कार्य की श्रेणी एवं स्थिति का चुनाव करता है जो उसके प्रशिक्षण के अनुकूल होता है।
कल्पना करते हैं कि यहाँ समस्या है तो मामले के भ्रम को टालने हेतु उसमें कुछ विशेष अन्तर कर देना आवश्यक हो जाता है। कानूनी व्यवसाय में अत्यधिक व्यक्तियों के आने की समस्या को कानूनी शिक्षा की समस्या को आवश्यक रूप से अलग किया जाये। कानूनी व्यवसाय को केवल कुछ व्यक्तियों के लिए आरक्षित करने के आधार पर कानूनी शिक्षा की योजना तैयार करना शिक्षा एवं सामाजिक न्याय की दृष्टि से असमर्थनीय होगा।
यह प्रश्न कि, किस प्रकार की कानूनी शिक्षा दी जानी चाहिए ताकि दक्ष वकील तैयार किया जा सके, यह पूर्णतया शैक्षणिक प्रश्न है, तथा इसका समाधान शिक्षाविदों द्वारा बिना इस बात से प्रभावित हुये किया जाना चाहिए कि अन्ततः क्या परिणाम निकलेगा। यदि कानून को व्यवसाय के रूप में चुनने वालों की संख्या नियत सीमा से अधिक हो जाती है। मेरे विचार से एक अन्तर अवश्य रखा जाये- कानूनी शिक्षा का इस प्रश्न से कोई अन्तर्निहित संबंध नहीं होना चाहिए कि, क्या संस्थानों को कानूनी शिक्षा पूर्ण दिवसीय या अंशकालिक रूप से प्रदान करने का कार्य सौंपा जाता है। यह संभव है कि अंशकालिक रूप से कार्यरत विधि-विद्यालय या विधि-महाविद्यालय के साथ सरलता एवं सहजता से कानूनी शिक्षा की प्रणाली की संकल्पना तैयार की जा सकती है।
इन प्रारम्भिक अवलोकनों के साथ मैं अपने आप से कानूनी शिक्षा के सुधार की समस्याओं पर विचार करने हेतु कुछ प्रश्न पूछता हूँ। यहाँ विचार हेतु कुल चार प्रश्नों का उद्भव होता है :
- छात्र को अपनी शिक्षा के किस स्तर पर कानून का अध्ययन प्रारम्भ
करने की अनुमति दी जानी चाहिए?
कानूनी शिक्षा के पूर्ण पाठ्यक्रम हेतु क्या अवधि होनी चाहिए?
कानूनी शिक्षा के पूर्ण पाठ्यक्रम के लिये क्या विषय सम्मिलित किये
जाने चाहिए?