90. बंबई प्रेजीडेन्सी में कानूनी शिक्षा के सुधार पर विचार - Page 414

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विचार से जो कुछ भी व्यक्त किया गया है उसमें सच्चाई का महत्त्वपूर्ण अंश होता है और वकील का यही वास्तविक व्यवसाय है। टिप्पणी के अनुसार वकील का व्यवसाय तर्क करना है, अतः वकील के व्यवसाय में तर्क महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मैं यह कहने के लिए तैयार हूँ कि एक वकील होने के लिये तर्क-वितर्क एक महत्त्वपूर्ण आधार है। तर्क-वितर्क क्षमता के विकास हेतु अनिवार्य अपेक्षायें हैं :-

क) किसी व्यक्ति की जानकारी एवं समाज में उसका कार्य-व्यवहार

कैसा है।

ख) मानव मस्तिष्क की कार्यशीलता की जानकारी।

ग) तार्किक निष्कर्ष तैयार करने हेतु प्रशिक्षित मस्तिष्क।

तार्किक सामर्थ्य की मूलभूत अपेक्षाओं के अतिरिक्त अन्य अपेक्षायें भी हैं जो पूर्णतया अलंकरित हैं परन्तु वे किसी भी रूप में भाषा की शालीनता एवं व्यवस्थित प्रस्तुतीकरण से किसी भी रूप में कम नहीं हैं। यदि सशक्त शब्दों में कहा जाए तो एक वकील के प्रशिक्षण में कानून के अध्ययन के अलावा निम्नलिखित विषयों का अध्ययन अवश्य सम्मिलित किया जाये : (1) समाज शास्त्र (2) मनोविज्ञान (3) तर्क (4) अलंकार शास्त्र एवं सार्वजनिक अभिव्यक्ति की कला एवं (5) भाषा पर अधिकार। कानूनी पाठ्यक्रम की वर्तमान विषय-सूची में इनमें से कोई विषय नहीं है। अतः पहला कदम पाठ्यक्रम में सुधार किया जाए एवं यह देखा जाए कि इन विषयों को इसमें सम्मिलित कर लिया गया है या नहीं।

यदि सुझावानुसार पाठ्य-विषय का विस्तार किया जाता है तो मुझे महसूस होता है कि द्वितीय प्रश्न कि कानूनी शिक्षा के पूर्ण पाठ्यक्रम हेतु क्या अवधि होनी चाहिये तो उसका केवल एक ही उत्तर है कि यह दो वर्ष का पाठ्यक्रम नहीं हो सकता जैसाकि यह अब है। यह दो वर्ष से अधिक का होना चाहिए। वास्तविक रूप में यह अवधि कितनी होनी चाहिये, यह एक ऐसा प्रश्न है जिसमें विचारों में भिन्नता हो सकती है। मेरे विचार से यह अवधि चार वर्ष की होनी चाहिये। मैं 4 वर्ष के इस पाठ्यक्रम को दो-दो वर्षों की दो अवधियों में विभक्त करूँगा। प्रथम दो वर्षों की समाप्ति पर विश्वविद्यालय या इस उद्देश्य हेतु नियुक्त किसी निकाय द्व ारा एक परीक्षा आयोजित की जाये एवं इस परीक्षा को कानून में स्नातक की प्रथम परीक्षा के नाम से जाना जाये। दूसरी दो वर्षीय अवधि के अंत में उसी प्राधिकरण द्वारा एक अन्य परीक्षा ली जाये एवं उसे कानून में स्नातक की द्वितीय परीक्षा के नाम से जाना जाये।