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हमेशा शिकायत रही है।
प्रथम प्रश्न के संबंध में, यह उल्लेख किया जाता है कि बम्बई विश्वविद्यालय में किसी वैज्ञानिक विषय जैसे इंजीनियरिंग, चिकित्सा, रसायन एवं भौतिकी में किसी डिग्री को स्नातकोत्तर डिग्री के रूप में नहीं माना जाता, जिसमें डिग्री पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने से पूर्व कला स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक होता है।
केवल कानून को एक अपवाद के रूप में क्यों माना जाना चाहिये। मैं न्यायोचितता के लिये किसी बेहतर आधार का सुझाव नहीं दे सकता। दूसरा, एक छात्र एक कला महाविद्यालय में एक कला-स्नातक की डिग्री प्राप्त करने हेतु अपनी चार वर्षों की अवधि के दौरान क्या अध्ययन करता है। पूर्व अनुमानों में पाया गया है कि कानून के अध्ययन में इसका उसे कोई ठोस लाभ नहीं मिलता, जैसाकि मैंने कहा है कि इस दृष्टिकोण ने कि कानून को एक स्नातकोत्तर अध्ययन के रूप में नहीं लिया जाना चाहिये बल्कि इसे मैट्रिक के बाद आरम्भ कर दिया जाना चाहिए। एक स्नातक अध्ययन के रूप में बम्बई विश्वविद्यालय में वर्तमान स्नातक पाठ्यक्रम में सहजता अथवा विशिष्टता की दृष्टि से अच्छा नहीं है। जिसे एक अच्छा वकील बनने के लिए अध्ययन किया जा सके एवं विशिष्टता की दृष्टि से भी अच्छा नहीं है जो हमें यह मतन बनाये रखने के लिए विवश करे कि कानून का अध्ययन प्रारम्भ करने के लिए पूर्व-अपेक्षा आवश्यक है। मैं उल्लेख करना चाहूँगा कि बैरिस्टर पाठ्यक्रम उर्त्तीण करना स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम नहीं है।
एक मत यह भी है कि विद्यार्थी को इंटरमीडियट के उपरान्त कानून का अध्ययन प्रारम्भ करना चाहिए। यह सुझाव अच्छा है क्योंकि यह पुरानी प्रणाली की ओर ले जाता है जब कानून एक स्नातकोत्तर डिग्री के रूप में नहीं था। मेरे विचार से इस सुझाव को अपनाना दो कारणों से गलती होगी। अनुभव से पता चलता है कि कला स्नातक की डिग्री पर्याप्त रूप से अच्छी नहीं है। इस अनुभव से मुझे प्रतीत होता है कि यह असगंत के बारे में सोचना है। यदि हम इंटरमीडियट के निम्न एवं न्यून स्तर को अपनाये तो हम कानून महाविद्यालय से बी.ए. स्नातक के उच्च एवं बेहतर स्तर से प्राप्त अपरिपक्व वकीलों की अपेक्षा अधिक कुशाग्र वकील बना सकते हैं। यदि कला स्नातक पर्याप्त रूप से उपयुक्त नहीं है तो मैं नहीं समझता कि कैसे मान लिया जाये कि इंटरमीडियट बेहतर होगी। दूसरा एक छात्र को कला विद्यालय में दो वर्षों के लिए क्यों छोड़ दिया जाए, जो उसे कानून के लिये आवश्यक प्रारम्भिक प्रशिक्षण भी नहीं दे सकता। यदि छात्र के प्रारम्भिक प्रशिक्षण में कोई कमी है तो उसे बिल्कुल आरम्भ से अपने अधीन लेकर प्रशिक्षण क्यों नहीं दिया जाता? उसे