402 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(क) कानून में एक डिग्री प्राप्त होने पर,
(ख) एक वरिष्ठ विधिवेत्ता के चैम्बर में एक वर्ष तक प्रशिक्षण एवं अदालती
जिरह के कानून एवं व्यवसाय के सिद्धांत में परीक्षा पास की हो और इसके
अतिरिक्त।
(ग) (।) जो व्यक्ति विधिवेत्ता (मूल क्षेत्र) की सनद् लेने का इच्छुक हो उसे उच्च
न्यायालय नियमों (मूल पक्ष) की परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।
(II) जो व्यक्ति विधिवेता अपीलीय क्षेत्र (ए.एस.) की सनद लेने का इच्छुक हो,
उसे उच्च न्यायालय के अपीलीय पक्ष के नियमों की परीक्षा उर्त्तीण करनी
होगी।
( III ) जो व्यक्ति सालीसिटर (न्यायाभिकर्त्ता) की सनद् लेने का इच्छुक हो,
उसे
(अ) उच्च न्यायालय नियमों (मूल एवं अपीलीय पक्ष) तथा
(ब) दस्तावेज़ नवासी की परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।
(घ) अच्छे नैतिक चरित्र का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने पर।
जब शिक्षा पद्धति व्यवसायों की सभी श्रेणियों के लिये एक समान एवं पर्याप्त व्यापक बना दी जाती है तो विद्यमानता, भिन्नता एवं असंगतता के लिये कोई न्यायसंगतता नहीं रह जाएगी।
वरिष्ठ वकील के चैम्बर में व्यावहारिक प्रशिक्षण के संबंध में उत्पन्न प्रश्न के संबध में विचारार्थ उत्पन्न निम्नलिखित बिंदुओं का उल्लेख करना आवश्यक है :-
क्या प्रशिक्षण के लिये कोई सुविधायें हैं?
यदि कोई वरिष्ठ अपने चैम्बर में प्रशिक्षण हेतु कानून के किसी विद्यार्थी को
प्रवेश नहीं देता या अत्यधिक शुल्क की माँग करता है तो उस स्थिति में
क्या होगा?
यदि प्रशिक्षण की परीक्षा व्यावहारिक हो तो इन सभी बिन्दुओं का निपटान अवश्य किया जाये। बिन्दु सं.-1 के संबंध में, मैं पूर्णतया निश्चित नहीं हो सकता। लेकिन मैं सोचता हूँ कि व्यावहारिक प्रशिक्षण की सुविधायें प्रदान करने के लिये बम्बई एवं जिला-नगरों में पर्याप्त संख्या में वरिष्ठ वकीलों को खोजा जा सकना संभव है। दूसरे बिन्दु पर मैं आश्वस्त हूँ कि जब तक उच्च न्यायालय वरिष्ठ वकील को अपने