90. बंबई प्रेजीडेन्सी में कानूनी शिक्षा के सुधार पर विचार - Page 422

403

चैम्बर में विद्यार्थी को प्रशिक्षण हेतु प्रवेश देने के लिये मजबूर करने के लिये तैयार नहीं होता, यह प्रणाली निष्फल हो जायेगी। किसी को व्यवसाय के दांव पेंच न सिखाने की आदत कि संभवतः भविष्य में प्रशिक्षणार्थी प्रतिद्वंद्वी बन सकता है एवं यह भय कि छात्र प्रशिक्षण के दौरान मुवक्किलों से मिल जाएगा एवं उनमें से कुछ को अपने साथ लेकर चला जायेगा, यह वरिष्ठों के मस्तिष्क में इतनी गहराई तक बैठा हुआ है एवं मैं इस बात से आश्वस्त हूँ कि जब तक उन्हें मजबूर न कर दिया जाये वे अपने चैम्बरों में विद्यार्थियों को लेने हेतु कभी सहमत नहीं होंगे। तीसरे बिन्दु के संबंध में मेरा विचार है कि उच्च न्यायालय को चैम्बरों में प्रशिक्षण हेतु शुल्क निर्धारित करना चाहिए अन्यथा शुल्क निषेध होना चाहिए नहीं तो इसके परिणामस्वरूप कानूनी व्यवसाय केवल धनिकों के लिये ही सुरक्षित रह जाएगा। ख्1,

  1. राजकीय विधि महाविद्यालय पत्रिकाः

खण्ड-7 : क्र. 1, जनवरी, 1936