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406 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सर्वोच्च न्यायालय के पास थी। ऐसा इसलिये है कि अधिकार लेख के अनुसार उच्च न्यायालय के पास केवल वही शक्तियाँ हैं जो कभी सर्वोच्च न्यायालय के पास थीं। उच्च न्यायालय की शक्तियों को जानने के लिये व्यक्ति को सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियों की जानकारी होनी चाहिए।

इसलिए सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश-सर जॉन ग्रांट को प्रिवी काउंसिल में आवेदन करने हेतु बाध्य होना पड़ा था जो कि निर्णय का एक विचारणीय विषय बन गया था। यद्यपि सामान्य प्रश्न यह था कि क्या कानून में यह प्रावधान होना चाहिये कि न्यायपालिका के आदेशों के कार्यान्वयन हेतु वे बाध्य होंगे, मामले का प्रत्यक्ष प्रश्न नहीं था लेकिन जन साधारण के दृष्टिकोण से अधिक महत्त्वपूर्ण प्रश्न अन्य कोई और नहीं हो सकता है। किसी राजनैतिक संविधान में विधायिका एवं कार्यपालिका की तुलना में न्यायपालिका एक कमजोर अंग है। यह स्वयं की शक्तियों के लिए विधायिका पर एवं अपने आदेशों के कार्यान्वयन हेतु कार्यपालिका पर आश्रित है। कार्यपालिका सामान्यतः न्यायपालिका के आदेशों का सम्मान करती है एवं उनको कार्यान्वित करती है। यह सत्य है कि सूचित किये गये मामले में न्यायपालिका हुक्मनामा/आदेश जारी करने हेतु अधिकृत नहीं है, अतः निष्पादकों/प्रशासकों द्वारा कार्यान्वयन हेतु इन्कार किया जाना उचित था। लेकिन ऐसा अवसर आ सकता है, जब कार्यपालिका ईर्ष्या या द्वेष के कारण न्यायपालिका के आदेश को कार्यान्वित करने से इंकार कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो न्याय अधर में लटक जायेगा और नागरिकों के जीवन, स्वतंत्रता एवं संपत्ति को खतरे संबंधी जन-साधारण के गंभीर प्रश्न उत्पन्न हो जाने की आंशका होगी। इन कथनों का सुझाव परस्पर विरोधी कारण द्वारा दिया गया है। इस विरोध को संघीय न्यायालय या उच्च-न्यायालय के आदेशों को कार्यान्वित करने की निष्पादकों/प्रशासकों की बाध्यताओं और संघ राज्यों एवं केसर के अंत एवं हिटलर के उदय के बीच के समय के जर्मन गणतंत्र के संविधान में इसी प्रकार के प्रावधानों में देखा जा सकता है। इस मामले के अनुसंधान का अध्ययन निश्चित रूप से लाभकारी होगा तथा जिज्ञासु स्वाभाविक रूप से ऐसा करेंगे।

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(बम्बई से याचिका द्वारा)

सर्वोच्च न्यायालय में माननीय न्यायाधीश गण (14 मई, 1829)

बम्बई सर्वोच्च न्यायालय को बन्दी प्रत्यक्षीकरण के आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है सिवाय जब इन स्थानीय क्षेत्रों, जिनमें सामान्य क्षेत्राधिकार है, के किसी व्यक्ति को या एक व्यक्ति जो उन सीमाओं से बाहर है परन्तु व्यक्तिगत रूप