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से उसके क्षेत्राधिकार में आता है, को निर्दिष्ट न हो। (1 नेप-58)
सर्वोच्च न्यायालय को उस जेल अधिकारी या स्थानीय न्यायालय के अधिकारी जिसके पास स्थानीय न्यायालय के आदेश से बन्दी बनाये व्यक्ति को रिहा करने का अधिकार नहीं है, बन्दी प्रत्यक्षीकरण का अधिकार नहीं है। (1 नेप-58)
सर्वोच्च न्यायालय बिना किसी सूचना या घोषणा के स्थानीय न्यायालय की न्यायिक सीमा की जानकारी प्राप्त करने के लिए बाध्य है विशेषकर बन्दी प्रत्यक्षीकरण के आदेश के प्रत्युत्तर में (1 नेप-59)
यह मामला सर्वोच्च न्यायालय के एकमात्र जीवित न्यायाधीश सर जॉन पीटर ग्रांट की याचिका में बम्बई में उजागर हुआ। इसमें उल्लेख है कि वर्तमान शासन के चौथे वर्ष में महामहिम ने अपने अधिकृत लेख में स्वीकृत, निर्देश, आदेश एवं प्रतिपादन किया है, ये कोर्ट ऑफ रिकार्ड बम्बई के अधिवासित क्षेत्र के लिए होगा, इस न्यायालय को बम्बई का सर्वोच्च न्यायालय कहा जाए और इस प्रकार बम्बई में कोर्ट ऑफ रिकार्ड का सृजन एवं गठन सर्वोच्च न्यायालय के रूप में हुआ और बम्बई में इस सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया और बम्बई के इस सर्वोच्च न्यायालय में दो अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति कनिष्ठ न्यायाधीश के रूप में की गई।
और कथित मुख्य न्यायाधीश और कथित न्यायाधीशों की नियुक्ति इस प्रकार की जाती है कि वे बम्बई की सम्पूर्ण बस्तियों, नगरों और बम्बई के द्वीपों और इसकी सीमा के अधीन फैक्टरियों और सभी क्षेत्रों या भविष्य में उक्त बम्बई सरकार द्वारा वर्धित क्षेत्रों में किए जाने वाले परिवर्तनों और महामहिम की न्यायिक पीठ द्वारा ग्रेट ब्रिटेन के हिस्से इंग्लैण्ड में विधिवत् या परिस्थितियों वश नियत क्षेत्रों में न्यायाधीश, शान्ति के संरक्षक और घटित घटनाओं के समीक्षक एवं जानकारी के रूप में होंगे।
और उक्त बम्बई स्थित सर्वोच्च न्यायालय समय की माँग के अनुसार महामहिम के शाही चिह्न की मुहर का प्रयोग करते हुए सभी लेख, सम्मन, सिद्धान्त, नियम, आदेश एवं अन्य बाध्यकारी प्रक्रिया, जो बम्बई स्थित उक्त सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रयोग, जारी या निर्णित किया जाता है वह राजा के नाम एवं आदेश से होना चाहिये एवं उसे सर्वोच्च न्यायालय की मुहर के साथ मुहरबन्द किया जाए।
तथा राजा द्वारा उक्त अधिकार लेख द्वारा बम्बई के तदेन रिकार्डर सर एडवर्ड वैस्ट, नाइट को प्रथम मुख्य न्यायाधीश एवं सर राल्फ राइस, नाईट जो प्रिंस ऑफ वेल्स द्वीप के तदेन रिकार्डर एवं सर चार्ल्स हरकोर्ट चैम्बर्स, नाइट को बम्बई स्थित सर्वोच्च न्यायालय के प्रथम अधीनस्थ न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त किया।