414 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अधिकृत व्यक्तियों के विवादों की शिकयतें इस देश में कम्पनी एवं संसद के समक्ष समय-समय पर लाये जाने के परिणामस्वरूप उत्पन्न हुईं।
स्वामियों के न्यायालय ने अपनी दिनांक 10 मई, 1773 की बैठक में इस महत्त्वपूर्ण विषय पर एक प्रस्ताव स्वीकार किया ‘‘कि न्याय के अधिकार के लिए आवेदन किया जाना चाहिए ताकि कम्पनी तीनों प्रेजीडेन्सियों में एक-एक महापौर न्यायालय बनाया जाए और महापौर के न्यायालयों की शक्तियों में वृद्धि करने के लिए राज्यपालों एवं परिषदों के न्यायालयों को न्याय करने के अधिकार प्रदत्त किये जाएं। बेरिस्टर रिकार्डर के रूप में कार्य करेगा। ‘‘वर्तमान अवसर पर प्रस्तावों के अन्य शब्द अत्यधिक उल्लेखनीय है’’ और विशेषकर भारत में बन्दी प्रत्यक्षीकरण के अधिकार को लागू करना।’’ यह भी उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष राजा के समक्ष प्रस्तुत याचिका में ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने कहा, ‘‘कि कम्पनी द्वारा किये गये सभी प्रावधानों में से कम्पनी द्वारा अभिस्तावित अत्यधिक प्रभावी प्रावधान शोषण को रोकना है जो कि बन्दी प्रत्यक्षीकरण का अधिकार है। इस प्रावधान से एक व्यक्ति को यह जानकारी मिल सकेगी कि उसको किस अपराध के लिए और किसके द्वारा दोषी पाया गया है, जो कि शामिल नहीं था।’’
कलकत्ता सर्वोच्च न्यायालय का शुभारम्भ 22 अक्तूबर, 1774 को किया गया। इस दिन से काफी वर्षों तक बन्दी प्रत्यक्षीकरण की याचिका नियमित रूप से अधिकतर देशज मामलों या व्यक्तियों के संबंध में जारी होती रही और इन क्षेत्रों में उन विषयों या व्यक्तियों के लिए जारी नहीं हुई जिनको भेदभाव के कारण ब्रिटिश मामले या व्यक्ति कहा जाता है। आगामी वर्ष की 16 जनवरी को दीवानी कचहरी के जेल अधिकारी के पास बन्दी प्रत्यक्षीकरण का प्रस्ताव भेजा गया कि वहाँ बन्दी व्यक्ति का पोषण किया जाए और याचिका दायर करने का आदेश जारी किया गया। इसका पालन किया जाना चाहिए कि 13वें जियो III सी. 63 (विनियमित अधिनियम 1773) के अन्तर्गत कलकत्ता में राजा के न्यायालय में स्थानीय नागरिक या अन्य के लिए कोई न्यायिक अधिकार नहीं है सिवाय कि प्रेजीडेन्सी में ब्रिटिश साम्राज्य के शासन द्वोत्र में निर्णय के लिए अधिकृत न्यायालयों एवं जेल की सज़ा देने के लिए। इसके साथ ही कम्पनी के ज़मींदारी न्यायालय कलकत्ता के मूल निवासियों के लिए न्यायिक अधिकार का प्रयोग करना जारी रखेंगे जैसे कि वर्तमान में ज़मींदारी न्यायालय कर रहे हैं। ये न्यायालय कम्पनी के रोज़गार या सेवा में न होने वाले स्थानीय नागरिकों के विरुद्ध शिकायतों, मुकदमों एवं अन्य कार्यवाहियों या ब्रिटिश मामलों या ऐसे मामले जो न्यायिक निर्णयों और जेल की सज़ा के लिए न्यायालय में नहीं आते थे, के लिए थे। 17 जनवरी को बन्दी प्रत्यक्षीकरण के संबंध में एक विवरण दाखिल किया गया और इसके निर्णय में