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416 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उनके पास थी, उसी के आधार पर आवश्यक तथ्य प्रस्तुत किये। पावेसी को हिरासत में ले लिया गया ताकि कानून का उल्लंघन करते हुए उसे भारत से बाहर भेज दिया जाए, वह ब्रिटिश शासन के अधीन नहीं था। अतः यह प्रतीत होता है कि समझौते के उपरान्त भारतीय शासन के सुधार और अंग्रेजी कानून के अधीक्षण के प्रारम्भिक काल पर समान रूप से विचार किया गया और कम्पनी द्वारा व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण का आदेश लागू कर स्वयं ही अपने आदेश का उल्लंघन किया गया। इस आदेश में व्यक्ति, जो अपनी निजी स्वतन्त्रता से वंचित हो गया है, को अधिकृत किया गया है कि पार्टी जिसने उसे किसी कानून के तहत बन्दी बनाया है, को यह बताने के लिए बाध्य कर सकता है कि उसका दोष क्या है?

कलकत्ता में ऐसे अनेक उदाहरणों का उल्लेख किया जा सकता है और मद्रास में भी ऐसे अनेक मामले घटित हुए हैं। बन्दी प्रत्यक्षीकरण को निर्णय की महत्ता को गंभीरता एवं उचित रूप से अनुभव किया गया है। कोई भी अधिनियम पारित किया गया हो, जो भी चार्टर स्वीकार किया गया हो, शक्तियों की कोई भी सीमा हो, निर्णय में कोई अपवाद नहीं था और इनमें से किसी अधिनियम या चार्टर के कार्य क्षेत्र की कोई सीमा नियत नहीं है।

परन्तु बन्दी प्रत्यक्षीकरण की याचिका कलकत्ता के सर्वोच्च न्यायालय को अधिकार पत्र 13वें जियो. III के अन्तर्गत स्पष्ट रूप से सौंपी गई थी, उन्होंने न्यायालय को यह अधिकार प्रदत्त किया ‘‘ऐसे न्यायिक क्षेत्र एवं अधिकार प्रदान किये गये जो राजा की पीठ के हमारे न्यायाधीशों को प्रदत्त हैं और वे इनका कानूनी रूप से इंग्लैण्ड कहे जाने वाले ग्रेट ब्रिटेन के हिस्से में परिस्थितियों के अनुरूप प्रयोग कर सकते हैं।’’ बन्दी प्रत्यक्षीकरण की याचिकायें ऐसी शक्तियों के अन्तर्गत जारी की गई जिन पर किसी भी रूप से प्रश्न नहीं किया सकता और जिससे उनकी अधिकारिता के संबंध में कोई संदेह उत्पन्न न हो सके। बम्बई के सर्वोच्च न्यायालय के संस्थापन में कलकत्ता के सर्वोच्च न्यायालय को प्रदत्त शक्तियों का संदर्भ दिया हुआ है। चौथा जियो. 4 (सी. 71) महामहिम को निःसन्देह चार्टर या अधिकार पत्र द्वारा शक्ति प्रदान करता है ‘‘बम्बई में सर्वोच्च न्यायालय को संगठित एवं स्थापित किया जाए, इसे स्थानीय नागरिकों एवं ब्रिटिश शासनाधीन व्यक्तियों दोनों पर दीवानी, फौज़दारी, नाविक न्यायालयों और धर्म संबंधी न्याय अधिकार की सभी शक्तियाँ प्रदान की जाए, इसके साथ ही अपने कार्य क्षेत्र में बेहतर प्रशासन के लिए शक्तियाँ व प्राधिकार, विशेष-अधिकार एवं स्वतंत्रता इस शर्त पर प्रदान की जाए कि बम्बई नगर और द्वीप एवं इसकी सीमाओं में और इसके अधीनस्थ क्षेत्रों तथा बाद में बम्बई सरकार द्वारा परिवर्तित क्षेत्र में उन्हीं मर्यादाओं, प्रतिबन्धों एवं नियंत्रण जो कि बंगाल में फोर्ट विलियम