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पर सर्वोच्च न्यायालय को तत्कालीन लागू कानूनों एवं प्रदत्त शक्तियों या इस संबंध में सरकार द्वारा किये गये परिवर्तनों के अनुसार लागू हैं, बशर्ते कि बम्बई के गवर्नर एवं परिषद तथा उक्त फोर्ट विलियम के गवर्नर जनरल को एक समान सुविधायें मिलेंगी, बम्बई के सर्वोच्च न्यायालय को किसी अन्य प्राधिकरण को स्थापित करने का अधिकार नहीं होगा जैसाकि फिलहाल फोर्ट विलियम पर सर्वोच्च न्यायालय तथा उक्त गवर्नर जनरल और परिषद् को प्रदान किया हुआ है।’’ कि केवल यह एक ऐसा प्रावधान है जिसके अधिकार से बम्बई के गवर्नर एवं परिषद् को वंचित रखा गया है परन्तु फोर्टविलियम के गवर्नर जनरल एवं परिषद को न्यायालय के कार्य क्षेत्र से ही वंचित नहीं रखा गया है बल्कि 21वें जियो, III द्वारा अन्य को भी अपने कार्य क्षेत्र में अपने लिखित आदेश द्वारा वंचित रखने की शक्ति है। बम्बई सर्वोच्च न्यायालय को प्रदत्त शक्तियाँ लगभग फोर्ट विलियम सर्वोच्च न्यायालय के अनुरूप है।
चौथे जियो. IV (सी.71) के इस अधिनियम के अनुक्रम में महामहिम ने अपने अधिकार-पत्र (मोरले डिग. खण्ड- II पृष्ठ 638) द्वारा सर्वोच्च न्यायालय का संस्थापन किया। इन पत्रों के द्वारा उन्होंने अनेक शक्तियाँ एवं अधिकार प्रदान किये जिनका प्रयोग इंग्लैण्ड के साम्राज्य में सामान्य याचिकाओं के लिए किया गया और उन्होंने अपने दीवानी न्याय क्षेत्र, अपने धार्मिक न्याय क्षेत्र और निर्णय देने वाले न्यायालय के न्यायिक क्षेत्र के विस्तार को सीमित रखना उचित समझा। केवल इन्हीं न्यायिक क्षेत्रों को सीमित रखा गया और जहाँ क्षेत्र का संबंध है, उस मामले में शक्तियाँ न्यायालय को प्रदत्त होनी चाहिए। दीवानी कार्य क्षेत्र को सीमित करने वाला अनुच्छेद इस प्रकार है (अनुच्छेद 28) और हम इसके साथ निर्देश, निर्दिष्ट एवं निश्चित करते हैं कि उक्त बम्बई सर्वोच्च न्यायालय का न्यायिक क्षेत्र, शक्तियाँ एवं अधिकार उन सभी व्यक्तियों पर लागू होंगे जो इससे पूर्व ब्रिटिश शासन की परिभाषा द्वारा बम्बई के लिए हमारे न्यायिक चार्टर में विभाजित किये हुए थे। किसी भी फैक्टरी/कार्यालय के शासनाधीन या बम्बई सरकार के आश्रय में रहने वाले हैं।’’ इस प्रकार यह वर्णित करता है कि बम्बई के सर्वोच्च न्यायालय का सम्पूर्ण न्यायिक क्षेत्र, शक्तियाँ और अधिकार उन व्यक्तियों पर लागू होंगे परन्तु इसका यह अर्थ नहीं है कि न्यायालयों का साधारण न्यायिक क्षेत्र अन्य व्यक्तियों पर लागू नहीं होता है। पूरे अनुच्छेद को इस प्रकार पढ़ा जाए, ‘‘कि बम्बई सर्वोच्च न्यायालय का न्यायिक क्षेत्र, शक्ति और अधिकार हमारे उक्त सभी मामलों (और कि उक्त न्यायालय सक्षम एवं प्रभावी होगा तथा सभी मुकदमों एवं कार्यवाहियों की सुनवाई कर निर्णय देगा) पर लागू होंगे’’, तब यह केवल दीवानी न्यायिक क्षेत्र जैसे मुकदमों एवं विवादों पर लागू होगा और न्यायालय के अन्य न्यायिक क्षेत्र की किसी भी सीमा में संदर्भित नहीं होगा। इसी प्रकार समान न्याय उन सभी