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यह वर्ष 1827 (आर.वी.राइट, 1827 मोरले की डाइजेस्ट खण्ड 1 पृष्ठ 120) ही था कि सर चार्ल्स ग्रे को निर्णय देने का अवसर मिला था जिससे विद्वान मुख्य न्यायाधीश की नागरिक के प्रति राय प्रमाणित होती है। अनेक प्रकार के व्यक्तियों जिन्होंने शेरिफ के अधिकारियों द्वारा न्यायालय की प्रक्रिया के निष्पादन में बाधा डालने का प्रयास किया, के विरुद्ध आपराधिक मामले की कार्यवाही करने का प्रस्ताव रखा गया। कुछ लोगों द्वारा की गई शिकायतें मूल नागरिकों के विरुद्ध थी, जो साधारण न्यायिक क्षेत्र के अन्तर्गत नहीं थी, उनके विरुद्ध कोई दोषारोपण को अधिमान्यता प्रदान नहीं की जा सकी परन्तु जो अन्य ब्रिटिश नागरिक थे या ब्रिटिश नागरिकों के अधीन कार्यरत थे, जो स्पष्ट रूप से अपवादित नहीं थे। सर चार्ल्स ग्रे ने हमारे द्वारा की गई भिन्नता को अभिव्यक्त रूप से मान्यता प्रदान की। ‘‘एक प्रश्न किया गया था कि क्या न्यायालय को मेंहदी अली खान के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही का अधिकार प्राप्त नहीं है क्योंकि वह क्षेत्रीय निवासी नहीं था।

उसकी अपनी राय में (बंगाल के मुख्य न्यायाधीश की राय) न्यायालय के न्यायिक क्षेत्र पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। न्यायालय के न्यायिक क्षेत्र में दो भिन्न शक्तियों जैसे न्याय संबंधी निर्णय (ओयर एण्ड टर्मिनर) और सम्राट की पीठ का न्यायालय निहित है। पहली वाली शक्ति सीमित है परन्तु दूसरी सीमित नहीं है बल्कि इस शासन के अधीन सभी प्रान्तों में लागू है। यह उसकी राय थी कि सर्वोच्च न्यायालय को कम्पनी के कार्य क्षेत्र में किसी भी स्थान पर किसी प्रकार के कार्य एवं अपराध के लिए कार्यवाही का अधिकार प्राप्त है जिस प्रकार सम्राट की पीठ का न्यायालय सभी प्रकार की कार्यवाहियाँ करने के लिए अधिकृत है।

न्यायालय को किसी नागरिक, विदेशी या किसी अन्य व्यक्ति को न्यायालय की प्रक्रिया की अवहेलना या गंभीर रूप से अवरोध करने वाले को सजा देने का सम्राट की पीठ के न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार पूर्व अधिकार है। यह कहना बिल्कुल असंगत होगा कि सूचना की बेहतर एवं सुविचारित पद्धति द्वारा सज़ा देने का अधिकार नहीं है और कुर्सी अधिग्रहण की केवल संक्षिप्त प्रक्रिया द्वारा सज़ा दी जा सकती है। वह केवल उस प्रश्न तक सीमित नहीं रह सकते यद्यपि उनके पास सम्राट की पीठ के न्यायालय का न्यायिक अधिकार है। उन्हें जानकारी नहीं है कि न्यायालय किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक अभियोग चला सकता है लेकिन उसे अभिव्यक्त करना होगा कि ऐसे कार्य का निष्पादन सावधानीपूर्वक करना चाहिए ताकि किसी को ठेस नहीं पहुँचे। इससे आपराधिक अभियोग के आधार का प्रश्न हल होगा क्योंकि मेंहदी अली पर उनका न्यायिक क्षेत्र उनका कलकत्ते का निवासी होने पर निर्भर नहीं था। तब उन्होंने कहा ‘‘कि चूँकि इनमें से कुछ नागरिक दोषारोपित नहीं