420 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
किये जा सकते थे और जो किये जा सकते थे वे बहुत ही कम आपराधिक प्रकृति के थे, उनके विरुद्ध आपराधिक मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती थी परन्तु यह उचित माना गया कि उन सबको दोषारोपित किया जाए।
इसके साथ ही दोषारोपितों पर मुकदमा चलाने की अवहेलना के लिए कुर्की का आदेश जारी करने के सभी आपराधिक मुकदमों के लिए स्वीकृति प्रदान करने से अलग कर दिया गया। दोषारोपण पर मुकदमा केवल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्णय देने वाले न्यायालय के अनुरूप चलाया जा सकता है और मुकदमा चलाने के अधिकार अपवादित शर्तों के साथ जुड़े हैं परन्तु अवहेलना की सज़ा देने का अधिकार सभी न्यायालयों को प्रदत्त है। आपराधिक सूचनाओं के आधार पर कार्यवाही करने का अधिकार राजा की पीठ के न्यायालय को प्रदत्त है और व्यक्तियों की बिना किसी सीमा के चार्टर की शर्तों पर मामले को सर्वोच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया जा सकता है।
महामहिम को सूचित किया जाता है कि पुस्तकों में ऐसे अनेक मामले देखे जा सकते हैं जिनके प्राधिकारी चाहते हैं कि उनके लिए उनके अनुरूप वर्णित पद्धति में अधिकार प्रदत्त हों। ब्राऊन के मामले में क्रो जेम्स पृष्ठ 543’’ मोन्टाग्यू, मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि सिन्क पोर्ट, जहाँ राजा का कोई आदेश नहीं था, का विशेषाधिकार पार्टियों द्वारा निर्दिष्ट था, परन्तु राजा के विरुद्ध ऐसा विशेषाधिकार नहीं हो सकता और यह आदेश को (बन्दी प्रत्यक्षीकरण की याचिका) अधिकृत आदेश है जो राजा के न्याय, जो उसने अपनी नागरिक के लिए सुनाना है, से संबंधित है और सम्राट के पास उत्तर होना चाहिए कि उसके किसी नागरिक को सज़ा क्यां दी गई और यह सभी व्यक्तियों को स्वीकार्य होना चाहिए और यह बन्दी प्रत्यक्षीकरण की धारा के अनुरूप होना चाहिए और इस याचिका पर कैलिस एवं राज्य के अन्य स्थानों एवं विवाद है कि यह न्यायिक क्षेत्र का विवाद नहीं है, के लिए निर्णय दिया परन्तु साम्राज्य एवं उसके न्यायालय विवादास्पद नहीं हो सकते, अन्य सभी न्यायाधीशों की भी यह राय है।’ महामहिम मुख्य न्यायाधीश मोन्टाग्यू के सिद्धान्त कालिस एवं ब्रिटिश साम्राज्य की रियासत के भीतर अन्य स्थानों पर सुनाये गये राजा के हुक्मनामों और जिनको न्यायालयों द्वारा उस समय तथा वर्तमान में पूरी तरह से मान्यता प्रदान की गई है, का दृष्टान्त देते हुए सशक्त किया गया है।
लार्ड मेसफील्ड ने काउले, 2 बरोस की रिपोर्ट, पृष्ठ 834 में निर्दिष्ट किया गया है कि सम्राट का हुक्म उसकी पूरी रियासत में सभी स्थानों पर लागू होना चाहिए और जब उस मामले में नियम निर्धारित किया जाने लगा तो महामहिम ने निर्देश