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दिया कि बारविक नगर में लागू नहीं हुए जूरी के हुक्म को लागू किया जाए परन्तु यह भी निर्णय लिया गया कि विभिन्न स्रोतों से उद्भूत उच्च अधिकृत हुक्मनामे का क्षेत्र अधिक व्यापक है। अब इस स्वाभाविक निष्ठा के उद्भव उच्च अधिकृतता के लिए नागरिक सम्राट के आभारी हैं और नागरिक इस निष्ठा के लिए सम्राट से सुरक्षा की अपेक्षा करते हैं। यह वही सिद्धान्त है जो सातवीं रिपोर्ट में केलविन के मामले में अभिव्यक्त है। अतः नागरिक निष्ठा के प्रति तथा सम्राट सुरक्षा के प्रति सचेत रहते थे। अब क्या इस पर तर्क किया जा सकता है कि किसी विजित क्षेत्र को महामहिम के शासन में सम्मिलित कर दिया जाता है तो उस देश के निवासी सम्राट के प्रति निष्ठावान होंगे। यदि वे ऐसा करेंगे तो यह समझ लेना चाहिए कि सम्राट उनको सुरक्षा प्रदान करेंगे और यह सुरक्षा का स्वरूप वैसा ही होगा जो कि वर्तमान विजित देशों को प्रदान की जा रही है। इसके लिए बन्दी प्रत्यक्षीकरण का अधिकृत हुक्मनामा भी जारी किया जाएगा ताकि यह जानकारी मिल सके कि उनको कानूनी रूप से बन्दी बनाया गया है या नहीं या उसके आदेश पत्र कि उसको जानकारी दी जाए कि क्या उनके विरुद्ध की गई कार्यवाही कानून के अनुकूल है या उसके निषेधाज्ञा का हुक्मनामा ताकि वह अपनी रियासत में संबंधित न्यायालयों को अपने कर्त्तव्यों का पालन करवा सके या उसका हुक्मनामा जिससे वे व्यक्तियों को ऐसे कार्य करने के लिए बाध्य कर सके जिसके लिए वे बाध्य हैं। अतः जब सम्राट अपने अधिकृत होने की शक्ति से संसद के अधिनियम से किसी न्यायालय को अधिकार प्रदान करता है तो न्यायालय जब तब तक उसके न्यायिक क्षेत्र को या किसी अन्य रूप से प्रतिबन्धित न किया जाए, को व्यापक रूप से कार्य करने का अधिकार होगा। यहाँ सम्राट ने वही शक्तियाँ प्रदान की हैं जिनका इंग्लैण्ड में सम्राट की पीठ प्रयोग करती है, ताकि इन शक्तियों का प्रयोग सर्वोच्च न्यायालय सम्पूर्ण कार्यक्षेत्र के साथ-साथ उन स्थानों पर भी कर सके जहाँ पर ये हुक्मनामे भेजे गये हैं। यह भी सत्य है कि भारत के मूल निवासी एक-दूसरे के प्रति विवाद के निजी मामलों के लिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक क्षेत्र में नहीं आते हैं कि कुछ हुक्मनामे, जो हमारे कानून के रूप में माने जाते हैं, एक पार्टी और दूसरी पार्टी पर लागू नहीं होते हैं और इसके बावजूद कि सम्राट के अधिकृत आदेश, जो चार्टर में किसी अनुच्छेद द्वारा प्रतिबन्धित नहीं है और न ही संसद के अधिनियम से हटाये गये हैं, के उद्देश्य के लिए सम्पूर्ण अधिकार सम्राट के पास होगा और उस न्यायालय द्वारा इसका प्रयोग किया जा सकेगा जिसके लिए संविधान ने अत्यधिक एवं असीमित अधिकार प्रदान किये हुए हैं।

बम्बई न्यायालय में अपने सशक्त तर्क के पूर्व भाग में एडवोकेट जनरल-बंबई ने वर्ष 1777 में सर एलिजा एम्पे के समक्ष घटना के बहुचर्चित मामले का उल्लेख