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422 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

करते हुए अपनी अभिव्यक्तियों से सूचित करने का प्रयास किया है कि न्यायालय को वर्तमान जैसे मूल नागरिकों के मामले में कोई न्यायिक अधिकार नहीं है (पटना परिशिष्ट सं. 17, नदारा बेगम बनाम बेहेदर बेग के मामले में सर ई.एम्पे का निर्णय) इस देश में सभी नागरिक नहीं बल्कि केवल कुछ व्यक्ति ही विशेष विवरणों के लिए उत्तरदायी हैं जो सम्राट के कानून या इस न्यायालय के न्यायिक क्षेत्र में आते हैं। चूँकि यहाँ अन्य कानून हैं जिसके प्रति अधिकतर नागरिक उत्तरदायी हैं और हम अपने न्यायिक क्षेत्र का विस्तार करने के इच्छुक नहीं हैं, हमने न्यायिक क्षेत्र का तर्क इसलिए प्रस्तुत किया है ताकि इस तर्क का अन्य तर्कों में स्वतंत्र रूप से प्रयोग किया जा सके। इस सिद्धान्त पर श्री दीवार द्वारा पर्याप्त दवाब डाला गया परन्तु सर इलिजा एम्पे के प्राधिकारी इस तथ्य के समर्थन के पक्ष में नहीं थे कि मूल निवासियों को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक क्षेत्र से छूट है। फिर यही प्रश्न उत्पन्न होता है कि यहाँ कोई सी न्यायिक सीमा संकल्पित है।

क्या ऐसा न्यायिक क्षेत्र है कि जहाँ उच्च अधिकृत आदेश जारी किये जाए, जिसको सकारात्मक अधिनियम के बिना समाप्त नहीं किया जा सकता था यह एक ऐसा न्यायिक क्षेत्र है जहाँ एक पार्टी और दूसरी पार्टी के मध्य विवादों पर निर्णय किया जाए और मुकदमों व कार्यवाहियों को किस कानूनी नाम द्वारा नामित किया जाएगा? सर एलिजा ने अवश्य ही मामले में अंतिम तर्क का संदर्भ दिया होगा ताकि उसे न्यायिक क्षेत्र के मामले में स्वतंत्र रूप से तर्क करने की स्वीकृति प्राप्त हो सके।

उसने तब तर्क दिया कि चूँकि 21 वीं जियो. 3 के.प. 70 के इस अधिनियम में अधिनियमित है कि ‘‘गवर्नर जनरल और परिषद् अपने अधिकार क्षेत्र के निवासियों तथा ईस्ट इंडिया कम्पनी की सेवा में कार्यरत सभी नागरिकों का उनके कार्यालयों का उल्लेख करते हुए नाम तथा रहने के स्थान का नाम दर्ज करते हुए वर्णक्रमानुसार रजिस्टर बनायेंगे। ‘‘यह सुनिचित करने के लिए सावधानी से काम नहीं किया गया कि कौन से मूल-नागरिक न्यायिक क्षेत्र के अधीन आते हैं और क्या किसी को भी छूट प्रदान नहीं की गई। परन्तु संक्षेप में कहा जाए तो हमें यह स्वीकार करने में कोई आपत्ति नहीं है कि केवल कुछ ही श्रेणियाँ न्यायिक क्षेत्र में थी। सभी वर्णित व्यक्तियों का पंजीकरण इस उद्देश्य के लिए समान रूप से वांछनीय है कि क्या हमारा तर्क इन सभी को उदारता से इसमें सम्मिलित कर लिया जाए, न्यायसंगत है या तर्कहीन है।

सामान्यतया उच्च अधिकृत आदेशों के सम्बन्ध में कहे जाने के बाद हम विशेष रूप से बन्दी प्रत्यक्षीकरण के आदेश के संबंध में जिक्र करते हैं। वर्ष 1818 में इस आदेश से संबंधित सैद्धान्तिक आदेश पर लार्ड एल्डन ने क्रोले के मामले, दूसरा