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424 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

ऐसा कभी मुश्किल से हुआ होगा कि भारतीय क्षेत्र में कोई व्यक्ति बिना ब्रिटिश नागरिकों के हस्तक्षेप के हिरासत में रहा हो।

लगभग प्रत्येक मामले में जेल अधिकारी स्थानीय निवासी है, स्थानीय न्यायालयों के सभी अधिकारी स्थानीय हैं परन्तु स्थानीय न्यायालयों का प्राधिकार हमेशा से अधिकतर ब्रिटिश नागरिकों के नियंत्रण में ही रहा है। ईस्ट इंडिया कम्पनी के कर्मचारी ही उनके न्यायिक क्षेत्रों पर पीठासीन हैं। इसमें बहुत चतुराई एवं गंभीरता से पता लगाना होगा कि कभी ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हुई हैं जब किसी व्यक्ति ने किसी व्यक्ति को हिरासत में रखा हो जब कि वह ब्रिटिश नागरिकों के अधीन कार्यरत न हो।

सर्वोच्च न्यायालय (1 नेप, 4) के गठन के पत्र से सम्राट द्वारा प्रदत्त सभी अधिकार पत्र के सिवाय उनके जो बम्बई द्वीप में रह रहे हैं या ब्रिटिश प्राधिकारियों द्वारा नियुक्त हैं, निरस्त हो जायेंगे, इससे प्रान्तीय न्यायालयों के किसी अधिकारी को निर्देशित हुक्मनामे के निष्पादन से मना कर सकता है और सरकार द्वारा अधिग्रहण किये गये अधिकारों के अनुरूप बापू गणेश (1 नेप, 6) के मामले में कार्यवाही होनी चाहिए।

तत्पश्चात् अधिवक्ता ने न्यायाधीशों के समक्ष गवर्नर एवं परिषद् के पत्र के आशय पर टिप्पणी देनी प्रारम्भ की।

लार्ड चान्सलर (लार्ड लायनडहर्स्ट) ने अवलोकन किया, ‘‘हम यहाँ बम्बई के सर्वोच्च न्यायालय का न्यायिक क्षेत्र निश्चित करने के लिए इकट्ठे हुए हैं। विचार-विमर्श का मुद्दा है कि उसके अधिकार क्या है।‘‘

सम्राट को बन्दी प्रत्यक्षीकरण का आदेश जारी करने का अधिकार है और इसको केवल स्पष्ट शब्दों द्वारा निरस्त किया जा सकता है और ये शब्द चार्टर में उल्लिखित नहीं हैं। ऐसे आदेश सम्राट की पीठ के न्यायालय में ब्रिटिश कानून द्वारा जारी किये जा सकते हैं और ये पीठ ब्रिटिश साम्राज्य के शासनाधीन किसी रियासत में सम्मिलित होनी चाहिए। ऐसे आदेश ब्रिटिश सर्वोच्च न्यायालयों से अनेक भारतीय प्रेजीडेन्सियों, जिनके संसद के अधिनियम द्वारा ब्रिटिश सम्राट के पीठ की सभी शक्तियाँ प्रदत्त हैं, पर लागू किये जाते हैं। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक क्षेत्र पर व्यक्ति विशेष के संबंध में प्रतिबन्ध जारी किए हुए हैं, परन्तु ये उचित कारण से ओयर एण्ड टर्मिनर एवं कारावास के आदेश देने वाले न्यायालयों की सामान्य प्रक्रिया के रूप में लागू होंगे। ये आदेश उन उच्च अधिकृत आदेशों को जारी करने के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते जो