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सम्राट के सभी निष्ठावान नागरिकों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य हैं तथा जिन मामलों में तत्कालिक एवं निर्णयात्मक आन्तरिक-स्थिति उत्पन्न न हो। परन्तु इसके बावजूद भी नागरिक पूर्णतया मूल निवासी है तो भी उसके साथी-नागरिक की हिरासत के संबंध में उससे प्रश्न नहीं किया जा सकता, ऐसा उन न्यायालयों के एजेंट भी नहीं कर सकते, जो ब्रिटिश न्यायाधीशों के अधीन हैं तथा महत्वाकांक्षी छूट से स्पष्ट बहिष्कृत हैं।
बन्दी प्रत्यक्षीकरण (31 कार. II सी. 2) के प्रतिष्ठित अधिनियम में अभिनिहित है ‘‘नागरिक की स्वतंत्रता को बेहतर ढंग से प्राप्त तथा समुद्र पार कारावास पर रोक के लिए अधिनियम तथा सम्राट बनाम काऊले, (आर.बनाम काऊले 1759, दूसरा बर 835) में यह उल्लिखित है कि ब्रिटेन में सम्राट की पीठ को अपने अधीनस्थ क्षेत्रों में नागरिकों को इस प्रकार के आदेश देने का अधिकार है जबकि इन आदेशों को जारी करने की आवश्यकता उत्पन्न नहीं होती कि लार्ड मेन्सफील्ड के प्राधिकार से ज्ञात होता है कि न्यायालय के पास ऐसा अधिकार है तथा इस तथ्य से भी ज्ञात होता है कि इंग्लैंण्ड के सम्राट की सभी रियासतों ने तत्संबंधी आदेश जारी किये हुए हैं। अतः वे न्यायालय के साधारण सिविल न्यायिक क्षेत्र की स्वीकृत सीमा को बढ़ा सकते हैं और इस प्रकार भारत में सर्वोच्च न्यायालय का न्यायिक क्षेत्र सभी विजित क्षेत्रों पर लागू होगा यद्यपि इसका सिविल न्यायिक क्षेत्र केवल बम्बई तक ही सीमित रहेगा। इंग्लैण्ड में ऐसे मामलों में राजा की पीठ के न्यायालय का दायित्व लार्ड कोक द्वारा सम्राट की पीठ के न्यायालय के अधिकार के संबंध में अपने वक्तत्व में कहा है कि (क.संस्थ.प. 4, केप.7) महामहिम अपने नागरिकों के सुखों, अपनी अर्न्तात्मा की शान्ति और अपने शब्दों पर कायम रहने के लिए, अपने महानुभावों और परिषद् के सदस्यों की सहमति से अपने न्यायाधीशों को हिदायत देते हैं कि वे अब से बिना किसी व्यक्ति विशेष के भेदभाव चाहे अमीर हो या गरीब, इसके साथ ही हमारे द्वारा उनको किसी के साथ कैसा व्यवहार करना है, के संबंध में भेजी गई हिदायतों एवं पत्रों को नजरअंदाज कर सभी नागरिकों के साथ कानूनी रूप से एक समान व्यवहार करेंगे। यदि ब्रिटेन में सम्राट की पीठ के न्यायालय द्वारा ब्रिटेन के सम्राट द्वारा भेजे गये पत्र की उपेक्षा न कर न्याय करते हैं तो यह आशा करना गलत होगा कि बम्बई के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश संबंधित क्षेत्र के गवर्नर एवं परिषद् से बिना कोई प्रतिवाद किये अपने कार्यकलापों का निपटान पूरी ईमानदारी एवं विवेक से कर पत्र या हिदायतें जारी करते हैं।
ईस्ट इण्डिया कम्पनी के लिए बोसनक्वेट एण्ड स्पेन को उसके वर्तमान महामहिम के चतुर्थ अधिनियम से स्पष्ट है कि बम्बई सर्वोच्च न्यायालय को बम्बई के अतिरिक्त कोई अन्य क्षेत्र देने का आशय नहीं है और बम्बई से बाहर प्रेजीडेन्सी ऑफ फोर्ड विलियम के क्षेत्र के भीतर सर्वोच्च न्यायालय का कार्य क्षेत्र होगा। एक तरह से इससे