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426 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

यह परिणाम निकलेगा कि चार्टर में दिये गये कार्यक्षेत्र की तुलना में अधिनियम के उद्देश्य कम प्रभावी होंगे।

परन्तु वर्तमान के लिए हम मान लेते हैं कि प्रदत्त अधिकार पूर्णतया फोर्ड विलियम के सर्वोच्च न्यायालय को प्रदत्त अधिकारों के समान हैं। भारत में जियो- III के 13 वें (मारले की डिग. खण्ड- II पृष्ठ 549) द्वारा संस्थापित नये न्यायालयों के कार्यक्षेत्र का प्रतिष्ठित सिद्धान्त था कि जहाँ तक कलकत्ता नगर में कालोनी का संबंध है, सभी निवासियों को अमान्य क्षेत्राधिकार प्रदत्त था। यहाँ एक ओर कार्यक्षेत्र है, जो अपने आप में व्यापक नहीं है, जिसकी पूरी रियासत में जाना प्रेजीडेन्सी पर निर्भर करता है और यह निर्दिष्ट वर्गों के लोगों के लिए स्वीकार्य है। दो चीजें बिल्कुल भिन्न हैं और हम स्वीकार करते हैं कि जहाँ तक इंग्लैंण्ड में सम्राट की पीठ के न्यायालय के विशेषाधिकार और प्राधिकार कलकत्ता या बम्बई की कालोनियों या निर्दिष्ट वर्गो के लिए लागू किये जा सकते हैं तो कार्यक्षेत्रों को स्वीकार किया जा सकता है, परन्तु इसका यह अर्थ नहीं है कि वे जिस क्षेत्र में हैं उसका सम्पूर्ण क्षेत्र उनका कार्य क्षेत्र होगा चाहे निर्दिष्ट वर्ग के नागरिक से न जुड़ा हो या भिन्न प्राधिकरण के अन्य न्यायालयों की कार्यवाहियों का नियंत्रण करे। इस अन्तर को विधानमण्डल द्वारा सोच समझ कर बुद्धिमत्ता से अपनाया है। मद्रास एवं बम्बई में फोर्ट विलियम पर ब्रिटिश कानून कम से कम पिछले सौ वर्षो से लागू है। यह जियो- I (1726ः13 जियो- I ) के चार्टर से सम्पूर्ण रूप से लागू हैं। यह वर्ष 1774 से पूर्व से वर्तमान नियम के रूप में जाना जाता है। नागरिकों पर कलकत्ता के स्थानीय न्यायिक क्षेत्र के अन्तर्गत जालसाजी एवं ब्रिटिश कानून द्वारा अपराधों के लिए मुकदमा चलाकर दोषी ठहराया जाता है। उन नगरों जो एक प्रकार की ब्रिटिश कालोनियाँ हैं, में आते थे, उन पर ब्रिटिश कानून लागू होता था, वे ऐसे स्थान पर पहुँच जाते थे जहाँ वे ऐसे व्यक्तियों, जो इंग्लैंड में तो आते हैं और उन पर उस स्थान के कानून के अनुसार मुकदमा चलता है जहाँ से वे आये हैं, की अपेक्षा न्यायिक क्षेत्र की उपेक्षा नहीं कर सकते थे। अन्य वर्ग ऐसा वर्ग था जो अपने कार्यकलापों से कम्पनी की नौकरी से ब्रिटिश नागरिक बन गया था ब्रिटिश नागरिक जो स्वेच्छा से उन सेवाओं में आये जो सम्राट के न्यायालयों के न्यायिक क्षेत्र में थे। यह कानूनी नीति थी कि उन व्यक्तियों को स्थानीय सीमाओं या निर्दिष्ट वर्गों को न्यायिक क्षेत्र के मुद्दे पर स्थानीय सीमा से बाहर कर दिया जाए ताकि वे अपने स्वयं के कानून द्वारा शासित हो सकें और अपवाद यह था कि उनको यह छूट थी कि वे अपने आप न्यायिक क्षेत्र का चुनाव कर सकते हैं और सर इलिजा एम्पेय ने हाऊस ऑफ कामन्स में अपने भाषण में इसी अभिमत को चुना [ संसदीय इतिहास खण्ड 26 (1341-1416) ] ।