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428 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

वर्ष 1773 में जियो- III (केप 63) के 13 वें अधिनियम में प्रावधान है (सेक्ट 13) कि महामहिम को फोर्ट विलियम में सर्वोच्च न्यायालय संस्थापित करने का अधिकार है और इस संबंध में प्रावधान संलग्न हैं (सेक्ट 14) ‘‘कि उक्त उन नये चार्टर, नियत किये गये अतिरिक्त न्यायिक क्षेत्र, शक्तियाँ और प्राधिकार, सिवाय उन सभी ब्रिटिश नागरिकों पर लागू नहीं होंगे जो बंगाल, बिहार एवं उड़ीसा या इसमें से किसी में भी उक्त यूनाइटिड कम्पनी के संरक्षण में रहते हैं, सभी पर चार्टर सक्षमता एवं प्रभावी रूप से लागू होगा तथा इसमें संस्थापित एवं संस्थपित किये जाने वाले सर्वोच्च न्यायालय को महामहिम के किसी नागरिक के विरुद्ध किये गये या किये जाने वाले अपराधों, दुराचरण या अत्याचारों के लिए सुनवाई करने तथा शिकायतों को निर्धारित करने का पूर्ण अधिकार एवं शक्ति होगी और बंगाल, बिहार और उड़ीसा में महामहिम के किसी नागरिक के विरुद्ध किसी मुकदमे पर कार्यवाही पर विचार, सुनवाई और निर्णय भी करेगा और कोई व्यक्ति, जिसके विरुद्ध उस ऐसा ऋण हो या कार्यवाही का कारण या शिकायत हो, जो यूनाइटेड कम्पनी या महामहिम के किसी व्यक्ति के अधीन कार्यरत हो या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कम्पनी में नौकरी कर रहा हो पर भी लागू होगा।

इस चार्टर की किसी धारा या अभिव्यक्ति या संसद के किसी अधिनियम में कोई भी अव्यक्तता या संदिग्धता पाई गई हो इस संबंध में हम अनुभव करते हैं कि संस्थापित किये गये न्यायालय सभी प्रान्तों में सामान्य न्यायिक क्षेत्र, सम्राट की पीठ के न्यायालय की प्रकृति के न्यायालय नहीं है, इनमें कुछ अपवाद है कि ये न्यायालय स्थानीय एवं सीमित न्यायिक क्षेत्र की अपेक्षा विस्तृत न्यायिक क्षेत्र के साथ अनेक मामलों में अनेक व्यक्तियों पर न्यायिक सीमा वाले न्यायालय हैं। निःसन्देह सैद्धान्तिक रूप से यह एक बहुत बड़ी भिन्नता है। सार्वभौमिक रूप से यह मान लिया गया है कि इन न्यायालयों का सीमित एवं स्थानीय न्यायिक क्षेत्र स्थानीय सीमाओं तक सीमित है, और यह न्यायिक क्षेत्र ब्रिटिश नागरिकों पर ही नहीं बल्कि सभी स्थानीय नागरिकों, मुसलमानों और हिन्दुओं के साथ-साथ ईसाइयों पर आपराधिक एवं सिविल मामलों पर इस प्रावधान के साथ लागू होता है कि विभिन्न धर्मों के लोगों पर उनके धर्मानुसार न्याय किया जाएगा, कुछ मामलों में और इन सीमाओं से हटकर न्यायालयों में वर्णित कुछ ब्रिटिश नागरिकों और ईस्ट इण्डिया कम्पनी में सेवारत व्यक्तियों के लिए अलग न्यायिक क्षेत्र होगा।

अगला ठोस प्रावधान (सेक्ट 16) है : ‘‘ सर्वोच्च न्यायालय भारत के बंगाल, बिहार, उड़ीसा या इनमें से किसी एक में रह रहे भारत के किसी निवासी के विरूद्ध महामहिम के किसी भी मामले/नागरिक की किसी सुनवाई या मुकदमें या कार्यवाही को निश्चित करेगा जिसमें कार्यवाही वर्तमान 500 रूपये से अधिक की हो और उक्त