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निवासी ने उक्त अनुबन्ध से सहमति दी हो कि विवाद की स्थिति में मामले पर उक्त सर्वाच्च न्यायालय द्वारा सुनवाई की जाएगी।‘‘ अधिनियम में सम्मिलित किया गया यह प्रावधान निश्चित रूप से असाधारण प्रावधान है जिससे सामान्य न्यायिक क्षेत्र का न्यायालय स्थापित होगा।
13 वें जियो- III (सी.13) के अधिनियम और तत्पश्चात् तैयार किये चार्टर से बन्दी प्रत्यक्षीकरण का आदेश जारी करने से अन्य मुद्दों के साथ-साथ विभिन्न विवाद भी उत्पन्न हो गये, इसके परिणामस्वरूप 21 जियो- III केप 70 का अधिनियम सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक सीमा के संबंध में लोगों के संदेह को दूर करने के लिए पारित किया गया। बन्दी प्रत्यक्षीकरण का आदेश उन व्यक्तियों के लिए जारी किया गया जो भू-स्वामी थे और ये तर्क दिया गया कि कोई व्यक्ति जिसके पास भूमि है और जो किराया देता है परन्तु ईस्ट इण्डिया कम्पनी से जुड़ने के लिए अन्य कोई व्यवसाय नहीं है, को ईस्ट इण्डिया कम्पनी की सेवा में होना माना जाएगा और इस प्रकार न्यायालय की सामान्य सीमा के भीतर माना जाएगा। ऐसा कहा गया है कि आवेदन ईस्ट इण्डिया कम्पनी को किये गये कि बन्दी प्रत्यक्षीकरण का आदेश जारी करने के अधिकार प्रदान करने के लिए अधिनियम में प्रावधान किया जाए। किन श्रेणी के व्यक्तियों के लिए इस आदेश के निर्देश सीमित रखे जाए, का उल्लेख नहीं किया गया परन्तु यदि मामला सरकार के विचारार्थ प्रस्तुत किया गया होता और तब भी 21 जियो- III (सी.70) के अधिनियम में कोई अनुच्छेद न जोड़ा गया होता तो यह अनुमान लगाने के कारण कम होते कि विधानमण्डल का विशेष आशय तर्क करने के लिए अधिकार देना है। निश्चित रूप से यह स्पष्ट रूप से उल्लिखित नहीं है परन्तु बन्दी प्रत्यक्षीकरण का आदेश जिन व्यक्तियों को सम्बोधित किया गया है अधिनियम की धारा 9 एवं 10 में उल्लेख के अनुसार न्यायिक क्षेत्र से स्पष्ट वर्णन की अपेक्षा रखते हैं इन धाराओं में कहा गया है कि इसमें विशेष रूप से उल्लिखित परिस्थितियों से उनको विशिष्ट नागरिक बनाया गया है वे परिस्थितियाँ न्यायालय के न्यायिक क्षेत्र में नहीं आती। इसके लिए इसमें एक धारा जोड़ी गयी, ‘‘ कि ऐसे नागरिकों को सुनिश्चित करने के लिए जो सर्वोच्च न्यायालय के कार्य क्षेत्र में आते हैं, गवर्नर जनरल और परिषद् द्वारा उन सभी नागरिकों के नाम, विवरण एवं आवास का सामान्य पते का वर्णाक्रमानुसार रजिस्टर ईस्ट इण्डिया कम्पनी में काम करने वाले लोगों के कुछ अपवादों के साथ बनाये गये। तब कैसे यह मामला 21 वें जियो- III (सी.70) के पारित होने के तत्काल बाद समझ में आ गया ? वर्ष 1773 और वर्ष 1781 के मध्य हुए कार्य-व्यवहार से कुछ उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों के विरुद्ध अभियोग प्रारम्भ हो गये तथा अन्यों के साथ सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सर इलिजा एम्पे, के विरुद्ध आरोप