430 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
लगे। इन्होंने हाऊस ऑफ कामन्स में अपने भाषण में अपना बचाव किया था और यह भाषण एक अलग प्रकाशन के रूप में बाद में प्रकाशित हुआ था और संसदीय इतिहास के 26 वें खण्ड (1341-1413) में इसकी नकल छापी गयी। सर इलिजा एम्पे ने इस प्रकाशन के पृष्ठ 1358 पर कहा है कि ‘‘ दी चार्टर‘‘ ने आपराधिक न्याय क्षेत्र बताया है बल्कि प्रान्तों में स्थानीय एवं क्षेत्रीय न्याय क्षेत्र नहीं बताये गये
यह न्यायिक क्षेत्र निवासियों के कुछ हिस्से पर लागू हुआ तथा इसमें कुछ वर्जन भी दिया गया है, परन्तु कलकत्ता के निवासियों के लिए दिया गया न्यायिक क्षेत्र सार्वभौमिक है जो कि कलकत्ता के सम्पूर्ण नगर की क्षेत्रीय न्यायिक सीमा है। ‘‘विद्वान न्यायाधीश का इस अवसर पर उद्देश्य उस से भिन्न है जो अब विचारणीय मुद्दा है। उसके लिए यह दर्शाना महत्वपूर्ण हो गया है कि कलकत्ता का न्यायिक क्षेत्र एक सामान्य न्यायिक क्षेत्र था और प्रान्तों के न्यायिक क्षेत्र के समान न्यायिक क्षेत्र नहीं था। पहला आशय सम्पूर्ण प्रान्तों के लिए नया है और चार्टर द्वारा लागू किया गया है। इंग्लैण्ड के सभी कानून उस चार्टर के प्राधिकरण द्वारा समर्थित हैं परन्तु कलकत्ता नगर के संबंध में अधिनियम का संचालन भिन्न था। वर्ष 1774 में सर्वोच्च न्यायालय के संस्थापन से काफी समय पूर्व कलकत्ता कोर्ट निर्णय देने एवं कारावास की सजा देने वाले न्यायालय थे जहाँ कलकत्ता पर क्षेत्रीय न्यायिक क्षेत्र के साथ इंग्लैण्ड के आपराधिक कानून लागू थे। 13वें जियो- III (सी.63) के द्वारा इन न्यायालयों को निरस्त कर सर्वोच्च न्यायालय के संस्थापन के लिए मार्ग प्रशस्त कर दिया। इसने पुराने न्यायालय के समकक्ष क्षेत्रीय न्यायिक क्षेत्र के साथ अपराधों के लिए मुकदमा चलाने का अधिकार प्रदान किया।‘‘
यह सूचित किया गया कि जिस कार्य क्षेत्र के लिए अब तर्क किया जा रहा है, वह मद्रास में लागू है। यह कार्य क्षेत्र न्यायिक क्षेत्र सर थामस स्ट्रेन्ज, मद्रास के मुख्य न्यायाधीश ने वर्ष 1802 में अपनी रिपोर्टां (मद्रास के मामलों पर टिप्पणी) के प्रथम संस्करण के पृष्ठ 135 पर बताया है कि नागपा चेट्टी बनाम रचमा एवं अन्य में वर्णित सिद्धांत से भिन्न हैं। उसने वर्णित किया है, ‘‘यह बिल्कुल सही रूप में अवलोकित किया गया है कि इस न्यायालय में किसी पैतृक न्यायालय के न्यायिक क्षेत्र के इसी प्रकार के मामले पर तर्क करना असंभव है। न्यायालय अपने संविधान द्वारा, कार्यवाही की अपनी पद्धतियों एवं उद्देश्यों के अनुसार, प्रान्त के सार्वभौमिक न्याय के महान उदाहरण और इस प्रकार प्रत्येक उदाहरण जिसमें अपने विवेक से मामले वापिस लेने के प्रयास, भिन्नता एवं सुस्पष्टता से मामले को देखने की बाध्यता, उद्देश्य प्राप्ति के लिए पर्याप्त न्यायिक क्षेत्र, जो अन्यत्र विद्यमान हो, के अनुसार कार्यवाही करेगा। न्यायालय को यदि प्रतीत होता है कि ऐसा उल्लेख नहीं किया