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जब वे शान्ति के न्यायाधीश एवं संरक्षक के रूप में कार्य कर रहे होंगे, के न्यायिक अधिकारों के समान होंगी। यह दबाव डाला गया कि इस धारा के द्वारा इंग्लैण्ड में सम्राट की पीठ के न्यायालय की सभी शक्तियाँ बम्बई सर्वोच्च न्यायालय को प्रदान की जाती हैं, यह शक्तियाँ केवल बम्बई के आवासीय क्षेत्रों के लिए नहीं होंगी बल्कि प्रेजीडेन्सी के सम्पूर्ण क्षेत्र में लागू होंगी और व्यक्तियों की इसमें कोई सीमा नहीं होगी और सम्राट की पीठ के न्यायालय को अधिकार होगा कि भारत’ के विभिन्न प्रेजीडेन्सियों की शर्त पर प्रान्तों के किसी भाग के लिए आदेश जारी कर सकेंगे यह एक ऐसी स्थिति है जिसे हमें आवश्यक रूप से पूर्णतया स्वीकार करनी है परन्तु हम महामहिम मेसफील्ड (काउले का मामला दूसरे ब्रो पृष्ठ 856) के एक वक्तव्य में पाते हैं कि उन्होंने ‘उपनिवेश’ शब्द का प्रयोग किया है। लेकिन उस निर्णय में महामहिम ने कहा है कि उन्हें याद नहीं या उनकी जानकारी में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जिस से यह ज्ञात हो कि बन्दी प्रत्यक्षीकरण का कोई आदेश जारी हुआ है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर बोर्ड को आवेदन किया गया है और हम सभी जानते हैं कि इस बोर्ड को कालोनियों के कानून के मामले में सामान्य अधीक्षण का अधिकार है। अतः न्यायालय के समक्ष एक शपथ पत्र दाखिल किया गया होता जिसमें तर्क किये जा रहे सिद्धान्त के अनुसार प्रत्यक्षतः न्यायिक क्षेत्र का हवाला देने का साहस कर इस बात के लिए कहा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति हिमालय पर्वत के तल पर हिरासत में लिया जाता है तो उसे वहाँ से वेस्ट मिनिस्टर पर सम्राट की पीठ के न्यायालय में लाया जाना चाहिए बशर्तें कि सम्राट की पीठ का न्यायालय आदेश जारी करने का यह एक उपयुक्त मामला समझते। यह कहा गया है कि न्यायालय को यह अधिकार प्राप्त है और इसका प्रयोग तब किया गया जब देश अधीन था। इसमें कोई संदेह नहीं है केलिस ने सदस्यों को संसद में भेजा और वहां इंग्लैंड का कानून प्रभावी कहा। हैले लेकिन, यह आवश्यक नहीं कि इस प्रश्न पर विचार किया जाए। हम जानते हैं कि न्यायालय में लार्ड के सिद्धान्त पर विद्वतापूर्ण व्याख्या की गई थी जिसमें Jura Summi Imperia और the jura mixtiemperia या potests jurisdiction में अन्तर स्पष्ट किया गया (हैले द्वारा इंग्लैण्ड के कानून के सिविल भाग का विश्लेषण, धारा-6) और यहा तर्क दिया गया कि यद्यपि सर्वोच्च न्यायालय में उस शब्द का साधारण अर्थों में स्थानीय निवासियों पर कोई सिविल न्यायिक सीमा नहीं है, कि इसके पास आपराधिक न्यायिक सीमा नहीं है, कि इसके पास नौवाधिकरण की न्यायिक सीमा नहीं है, फिर भी इसके पास सम्राट के सभी नागरिकों पर प्रयोग करने के लिए विशेष अधिकार है। अब यह उल्लेखनीय है कि इस चार्टर के लगभग सभी भाग, जो अब विचाराधीन हैं में ‘‘शक्ति-न्यायिक क्षेत्र एवं प्राधिकार शब्द मिलेंगे।