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सेन्ट जार्ज के अन्तर्गत अन्य सभी फैक्टरियों के लिए शान्ति के न्यायाधीश होंगे तथा उनके पास शान्ति के न्यायाधीश के रूप में कार्य करने के अधिकार होंगे।

यह अधिकार उनको उसी रूप में जिस रूप में ग्रेट ब्रिटेन द्वारा किसी देश, शहर या नगर, जो हमारे इंग्लैण्ड के नाम से उक्त साम्राज्य में सम्मिलित हैं, को ग्रेट ब्रिटेन की मुहर लगे अधिकार पत्र या आयोग द्वारा गठित शान्ति के न्यायाधीश को प्रदान किये गये हैं, प्रदान किये जायेंगे और वे इन का प्रयोग करेंगे या कर सकेंगे। जब सर्वोच्च न्यायालय का गठन किया गया था तब यह सही था कि उस न्यायालय के न्यायाधीशों को उस पूरे क्षेत्र जिसमें उसे अपनी साधारण न्यायिक सीमा या अधिक विस्तृत न्यायिक सीमा के साथ, शान्ति का संरक्षक और न्यायाधीश घोषित किया गया, और तब यह स्वाभाविक था कि न्यायाधीशों को उनके कमीशन द्वारा शान्ति के न्यायाधीश की सम्मिलित न्यायिक सीमा प्रदान करने की बजाय, उनके पास शान्ति एवं न्यायाधीश की शक्ति, जिस प्रकृति की सम्राट के पीठ के न्यायालय के जजों के पास है, होनी चाहिए और यही इस धारा का स्पष्ट आशय प्रतीत होता है। दूसरी ओर यह भी तर्क दिया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय को सभी न्यायालयों को सम्राट के अनिवार्य आदेश, किसी भी विषय में हो, बम्बई की प्रेजीडेन्सी के सम्पूर्ण क्षेत्र में जारी करने का अधिकार है। यदि यह शक्ति पूर्व के सामान्य परिच्छेद में होती तो याचना और त्रैमासिक सत्रीय न्यायालयों की स्थापना के पश्चात् तब चार्टर पर वैधानिक कार्यवाही क्यों की गई कि उक्त न्यायालयों और बम्बई के द्वीप और नगरों एवं इसके अधीनस्थ फैक्टरियों के लिए नियुक्त न्यायाधीशों एवं मैजिस्ट्रेटों को चार्टर के अधीन कानूनी अधिकार प्रदान किये गये कि ये सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों एवं नियंत्रण अधीन इस वर्ग, रीति एवं स्वरूप में होगा जैसे कि इंग्लैण्ड की निचली अदालतें एवं मैजिस्ट्रेट नियमाधीन सम्राट की पीठ के आदेशाधीन हमारे न्यायालय एवं उनके नियंत्रण में होंगे और इसके लिए उक्त सर्वोच्च न्यायालय को शक्ति प्रदान की जाती है तथा अधिकृत किया जाता है कि अनुदेश, सभादेश, कार्यवाही करने पर गलती सुधारने के आदेश जारी करें (धारा 59 मॉरले डाइजेस्ट ।। पृष्ठ 677) न्यायालय को बम्बई की स्थानीय सीमा में कई न्यायालय स्थापित करने के संबंध में न्यायिक अधिकार प्रदान करने से इस अनुच्छेद का क्या औचित्य है यदि प्रेजीडेन्सी के सभी क्षेत्रों की सीमा-स्थापित प्रत्येक न्यायालय के पास सामान्य न्यायिक अधिकार है। वास्तव में न्यायालय को निर्णय देने वाले न्यायालय के अपने स्वरूप के अतिरिक्त न्यायिक अधिकार प्रदान किये गये।

34 जियो ।।।, अध्याय-52 जो अन्तिम से पूर्ववर्ती चार्टर अधिनियम था, के अधिनियम में बंगाल के गवर्नर-जनरल को शक्ति प्रदान की गई कि महामहिम के नाम से