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438 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

शासनादेश जारी किया जाए और बम्बई प्रान्त, प्रेजीडेन्सी, द्वीप नगर और फैक्टरी और इससे संबंधित एवं अधीनस्थ क्षेत्रों के लिए शान्ति के न्यायाधीश नियुक्त किए जाएँ और यह घोषित करते हुए एक नियम (धारा 153) जोड़ा गया, ‘‘सभी दोषियों, निर्णयों, आदेशों और कार्यवाहियों की पेशकश किसी भी ब्रिटिश क्षेत्र या भारत के अधिकार क्षेत्र में किसी भी शान्ति के न्यायाधीश या न्यायाधीशों के समक्ष निर्णय देने वाला न्यायालय के अतिरिक्त अन्य न्यायालयों में की गई, या घोषित की गई को निर्णय देने वाले एवं जेल की सज़ा देने वाले न्यायालयों और उसी प्रेजीडेन्सी से तथा प्रभावी या असंतुष्ट किसी पार्टी के की गई ‘कि सभी आपराधिक घोषणाओं’ पर समादेश के आदेश द्वारा हटाया जाए’ जा सकेंगे।’’

इसी प्रकार का प्रावधान स्व. सम्राट के 53वें केप 155, धारा 105 के द्वारा जिला न्यायाधीशों के समक्ष अपराधों के संबंध में किया गया जिसके द्वारा समादेश के तहत उन्हें प्रेजीडेन्सी के निर्णय देने के न्यायालय द्वारा हटाने की शक्ति प्रदान की गई। अब यह सिद्धान्त है कि यहाँ समादेश के आदेश को जारी करने का निर्णय स्पष्ट रूप से वापिस नहीं लिया जाता तो यह सम्राट की पीठ के न्यायालय में सामान्य कानून द्वारा विद्यमान रहता है, और इसको न्यायिक अधिकार से स्पष्ट रूप से वापिस लिया जाना चाहिए। परन्तु यहाँ इसे वापिस लेने का प्रश्न नहीं है बल्कि इसे स्पष्ट रूप देने का प्रश्न है और क्या यह विद्यमान होता जब तक इस प्रकार प्रदत्त न किया गया होता। बम्बई में न्यायिक निर्णय करने वाले न्यायालयों के जज सर्वोच्च न्यायालय के जज हैं परन्तु वे जिला न्यायालयों पर सर्वोच्च न्यायालय की हैसियत से अधीक्षण का प्राधिकार नहीं रखते हैं परन्तु उन्हें न्यायिक निर्णय देने वाले न्यायालय से समादेश जारी करने के उद्देश्य से विशेष अधिकार प्रदान किया जाता है। यह स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि सर्वोच्च न्यायालय के पास वह अधिकार नहीं है जिसके लिए तर्क किया जा रहा है।

महामहिम टेन्टरडेन- ‘‘शान्ति के न्याय संबंधी मुकदमे लिखित आदेश द्वारा प्रेजीडेन्सी ऑफ सर्वोच्च न्यायालय में स्थानान्तरित किये जायें।’’

न्यायिक निर्णय देने वाले न्यायालयों का गठन उन्हीं व्यक्तियों से होता है परन्तु उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के जज के रूप में प्राधिकार नहीं दिये जाते बल्कि न्यायिक निर्णय करने वाले जजों के रूप में प्राधिकार प्रदान किये जाते हैं।

बम्बई के चार्टर में सार्वभौमिक आपराधिक न्यायिक सीमा प्रदत्त नहीं है और इसके लिए न्यायिक निर्णय एवं जेल की सज़ा देने वाले न्यायालय गठित किये हुए हैं ताकि