92. और लार्ड ने - तक कहा - Page 458

439

न्यायालय आपराधिक न्यायिक क्षेत्र का प्रयोग कर सके। सिविल न्यायिक सीमा की शक्ति विशिष्ट रूप से दी गई है। जिन व्यक्तियों को न्यायिक अधिकार प्रदान किये जाने चाहिए उनका विशिष्ट रूप से उल्लेख किया जाना चाहिए। प्रांतों पर सामान्य न्यायिक अधिकार आयोग को सम्राट की पीठ के न्यायालय के विशेष अधिकार एवं प्राधिकृत करने के साथ प्रदान नहीं किये जा सकते। सर्वोच्च न्यायालय एक सिविल कोर्ट है और समानता का न्यायालय है तथा दूसरी ओर गठन के लागू नियमों के अनुसार आप सभी कुछ देते हैं या कोई हिस्सा देते हैं, आप सभी न्यायिक अधिकार प्रदान करते हैं, आप इसे इस प्रकार प्रदान करते हैं जैसे कि यह एक सम्पूर्ण सम्पदा है और तब आप इन छोटी-छोटी लाभकारी सम्पदायें विस्तृत रूप से वितरित करते हैं। जिनको पहले से ही गठन के इस नियम के अनुसार सब कुछ प्राप्त हो चुका है या सम्पूर्ण से कुछ कम प्राप्त हुआ है।

लेकिन मोरो रघुनाथ (1 नेप, 8) के संबंध में यह तर्क देना असंभव है कि यह शक्ति बम्बई के सर्वोच्च न्यायालय को दी जा सकती थी जैसाकि उसके मामले में प्रयोग करने का प्रयास किया गया था। वह पूना में रहता था। वह चाहता था कि उसका मामला बम्बई के न्यायालय में स्थानान्तरित कर दिया जाए। बन्दी प्रत्यक्षीकरण का अधिकार एक शपथ-पत्र द्वारा प्रदान किया गया था और एक उच्च दर्जे का व्यक्ति, जो अधिकारच्युत परिवार से संबंधित था, को बुलाया गया और निर्देशित किया गया कि उस बच्चे को पेश किया जाए जिसका वह कानूनी संरक्षक है परन्तु उसके बारे में यह कहा गया था कि उसे बेवजह हिरासत में रखा गया है। तत्काल ही यह प्रश्न उठा कि उसे इस न्यायिक क्षेत्र में क्यों रखा गया है? यदि उसने विरोध किया होता और विवाद होता कि जिन्होंने अवज्ञा की है उनके विरुद्ध कुर्की के आदेश कैसे जारी किये जा सकते थे? कुर्की जारी करने की इस शक्ति द्वारा आप स्थानीय न्यायिक अधिकार प्रदान करते हैं, जो चार्टर की नियमित निर्धारित शर्तों के अनुसार विद्यमान नहीं है। यदि अवज्ञा करने वाली पार्टी मनोनीत वर्ग की होती और उसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक अधिकार प्रदत्त होते हैं वह पंजीकृत होना चाहिए : यह व्यक्ति पंजीकृत नहीं था और इस प्रकार उसे न्यायालय में आदेश जारी करने का कोई न्यायिक अधिकार न होना प्रतीत होता है, और वह इसकी अवज्ञा की अवेहलना करने का दोषी नहीं हो सकता। जबकि रोमन सम्राट अपने नागरिकों को बताते हैं कि जहाँ जज अपनी क्षेत्रीय सीमा का अतिक्रमण करता है वे आज्ञा का पालन करने के लिए बाध्य नहीं हैं। (पेंड लिब, 2, टिड 1, धारा 20)

बापू गणेश के मामले में (1 नेप 11) प्रान्तीय न्यायालय के जेल अधिकारी को