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विलियम या स्थानों या वहाँ की सरकार के अनुसार प्रदत्त अधिकारों के साथ लागू होगा। (मारॅले डाइ. II पृष्ठ 645)
इस प्रकार नियुक्ति करते हुए उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का गठन किया ‘‘जिसके पास ऐसे न्यायिक क्षेत्र और अधिकार हैं जो हमारे सम्राट की पीठ के हमारे न्यायाधीशों को प्रदत्त हैं और जिनका ग्रेट ब्रिटेन के हिस्से इंग्लैण्ड में, जहां तक परिस्थितियां स्वीकृति करती है, कानूनी रूप से प्रयोग करते हैं । यहां ऐसे सभी अधिकारों के साथ न्यायालय है (धारा 10) जो इस देश में समा्रट की पीठ के न्यायालय के पास है। तब अपवाद कहां है जो किसी विशिष्ट मामले में इसके न्यायिक क्षेत्र से जुड़ने को रोकती है? हम इसे कार्यवाहियों, मुकदमों और अभियोगों को प्रभावित करने वाला पाते हैं और इस प्रकार आपराधिक सूचना, बंदी प्रत्यक्षीकरण के आदेश और अन्य उच्च अधिकृत आदेशों को प्रभावित करते हैं ऐसा अन्य कहीं भी नहीं पाया जाता है।
सर थामस स्ट्रेंज नागथा चिट्टी बनाम राजूमॉ? के एकल निर्णय का हमारे प्रश्न से कोई संबंध नहीं है। एक व्यक्ति जो मद्रास न्यायालय की न्यायिक सीमा में नहीं आता उसको कानून की कपटपूर्ण प्रक्रिया से इस न्यायिक सीमा में लाया गया।
मुख्य न्यायाधीश ने वहां निर्णय दिया (स्टेंज के मद्रास मामले, पृ. 135)’’ कि किसी नागरिक को मद्रास सरकार द्वारा उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी उद्देश्य हेतु लाया जाता है और तीसरे पक्ष, जिसको इसके यहां लाने का कोई संबंध नहीं है, इसकी सीमाओं में होने का लाभ उठाता है और उसे इसी न्यायिक सीमा में रखता है, ऐसा प्रतीत होता है कि वह सहमत है जबकि ऐसा करने की स्वीकृति नहीं है, जबकि मामले में ऐसा नहीं होना चाहिए जबकि उन्हें यहां वादी के अन्यायपूर्ण कार्यों के विरुद्ध उनके बचाव के लिए यहां लाया गया है, इसके परिणामस्वरूप हमने लाभ उठाकर इसे यहां बिठा लिया, वास्तविकता के विपरीत कोई भी व्यक्ति अपनी गलती का लाभ नहीं उठा सकता।’’
तब यहाँ उल्लिखित मामले का पूरा प्रभाव, जो दो व्यक्तियों के मध्य सिविल मुकदमे में जहां प्रतिवादी स्पष्ट रूप से न्यायिक सीमा में नहीं आता है जब तक कि वादी अपने कपटपूर्ण कार्यकलाप से उस सीमा में ले आता है, ऐसी कार्यवाही से गलत कार्य करने का लाभ गलत कार्य करने वाले को किसी प्रकार के भेदभाव से नहीं दिया जा सकता।
यह सत्य कहा गया है कि कोई धारा स्पष्ट रूप से अनिवार्य आदेश जारी करने