446 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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बम्बई शहर के अस्पृश्नीय कर्मचारी
द्वारा -जी.आर प्रधान, पी.एच.डी.
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डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, एम.ए., पी.एच.डी.
डी.एससी., बार-एट-लॉ जे.पी. की
प्रस्तावना
यह लेख एक शोध प्रबन्ध है जिसे लेखक ने बम्बई विश्वविद्यालय द्वारा कला में दर्शनशास्त्र में डाक्टर की उपाधि प्राप्त करने की निर्धारित अपेक्षाओं को पूर्ण करते हुए लिखा है। इसे विश्वविद्यालय द्वारा स्वीकार किया गया, उसकी गुणवत्ता के पक्ष में पर्याप्त अनुशंसायें की जानी चाहिये थी एवं चूँकि मेरे द्वारा प्रस्तावना लिखी जाने के कारण ऐसा किया जाना आवश्यक नहीं समझा गया। मैं नहीं जानता कि लेखक ने मुझ से प्रस्तावना लिखवाने की आवश्यकता क्यों अनुभव की। संभवतः मैं उस समुदाय से संबंधित हूँ जिस समुदाय का जीवन चरित इस अनुसंधान का विषय होने के कारण उन्होंने मुझसे प्रस्तावना लिखने के लिए कहा और मैंने उनके आमंत्रण को प्रसन्नतापूर्वक कर प्रस्तावना लिखी।
लेखक ने बम्बई नगर में विभिन्न विषयों के अन्तर्गत अस्पृश्यों के जीवन का अध्ययन किया है एवं इस प्रकार अस्पृश्यों की अत्याधिक संख्या आमदनी, रोजगार, ऋण आदि की परिणामात्मक जानकारी देने वाले विचार अपनी प्रस्तावना में दिये हैं। उसने आंकड़ों को एकत्रित किया है जो वास्तव में अमूल्य हैं। किसी भी सांख्यिकीय अनुसंधान में यह प्रश्न उठता है कि क्या अध्ययन किये गये मामले आदर्शात्मक हैं या नहीं? औसत सामान्य हो सकते हैं लेकिन अनुसंधान किये गये मामले आदर्शात्मक होने चाहिए अतः उसके द्वारा अस्पृश्यों के जीवन-चरित की प्रस्तुत तस्वीर सही है।