94. क्या गाँधी एक महात्मा है? - Page 467

448 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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क्या गाँधी एक महात्मा है। मैं इस प्रश्न से असहमत हूँ। यह प्रश्न मुझे क्यों परेशान करता है, इसके दो कारण हैं। पहला, मैं सभी महात्माओं से घृणा करता हूँ एवं मेरा दृढ़ विश्वास है कि इन सब को हटा दिया जाना चाहिए। मेरी यह राय इसलिए है कि उनका अस्तित्व उस राष्ट्र, जिसमें उनका जन्म हुआ, में अभिशाप के रूप में हैं।

मैं ऐसा क्यों कहता हूँ इसका कारण है कि वे ज्ञान एवं तर्क के स्थान पर अन्धविश्वास को शाश्वत बनाने का प्रयास करते हैं।

दूसरा, मैं नहीं जानता, कि जनसाधारण महात्मा शब्द द्वारा वास्तव में क्या समझते हैं।

इसके बावजूद चूँकि ‘चित्रा’ का सम्पादक मुझ से प्रत्युत्तर प्राप्त करने के लिये महत्त्वाकांक्षी प्रतीत हो रहा है, इसलिए मैंने इस प्रश्न का उत्तर देने हेतु गम्भीरता से प्रयास करने का निर्णय किया है।

एक साधरण हिन्दू के अनुसार सामान्यतया कहा जाता है कि एक महात्मा के रूप में जीवन-यापन करने वाले व्यक्ति के पास तीन वस्तुएँ अवश्य होनी चाहिए यथा-उसकी वेशभूषा, उसका चरित्र एवं उसका विशेष सिद्धान्त। यदि एक महात्मा को परखने हेतु इन विशेषताओं को कसौटी के रूप में लिया जाता है तो अज्ञानी एवं अशिक्षित व्यक्ति, जो उद्धार के लिये दूसरों की ओर देखते हैं, तो उनकी दृष्टि से मोहनदास करमचन्द गाँधी को महात्मा के रूप में पुकारा जा सकता है। भारत में किसी व्यक्ति के लिये सिर्फ अपनी वेशभूषा को बदलकर महात्मा बनना अत्यंत सरल है। यदि आप ने साधारण कपड़े पहने हुए हैं तथा साधारण जीवन जी रहे है फिर भी यदि आप असाधारण श्रेष्ठ कार्य कर रहे हैं तो कोई व्यक्ति आपकी तरफ ध्यान नहीं देगा। लेकिन यदि कोई व्यक्ति जो सामान्य शिष्टाचार से व्यवहार नहीं करता एवं अपने चरित्र का विलक्षण रवैया एवं असामान्यता दर्शाता है तो वह सन्त या महात्मा बन जाता है। यदि आप सूट या साधारण कपड़े पहनते हैं एवं कुछ करते हैं तो लोग आपकी तरफ देखना भी पसन्द नहीं करेंगे। लेकिन यदि वही व्यक्ति