450 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कपट एवं सहज चातुर्य से अपने आपको नेतृत्व वाले स्थान पर बनाया हुआ है। एक व्यक्ति जिसे अपनी क्षमता एवं चरित्र पर विश्वास है वह जीवन की वास्तविकताओं का सामना करता है, साहसपूर्वक एवं निर्भीकता से सामना करता है। नेपोलियन सदैव सामने से आक्रमण करता था। वह विश्वासघात में विश्वास नहीं करता था एवं उसने कभी भी धोखे से हमला नहीं किया। विश्वास एवं धोखा कमज़ोर लोगों के हथियार हैं गाँधी ने हमेशा इन हथियारों का प्रयोग किया है। कई वर्षों तक वह अपने आपको गोखले का विनम्र अनुयायी बताते रहे हैं। उसके पश्चात् वह कई वर्षों तक तिलक की प्रशंसा करते रहे हैं। बाद में तिलक से घृणा भी की है। प्रत्येक व्यक्ति जानता है कि यदि कुछ समय पश्चात् उसने धन इक्ट्ठा करने के लिए तिलक का नाम नहीं लिया होता तो वह स्वराज्य कोष हेतु एक करोड़ की राशि एकत्रा नहीं कर सकता था। एक चतुर राजनीति की भांति अपने निजी सम्बंधों को भुलाने एवं अन्य मुद्दों को एक तरफ रखते हुए, उसने फंड के साथ तिलक का नाम जोड़ा।
गाँधी इसाई धर्म का घोर विरोधी था। पश्चिमी जगत को प्रसन्न करने के लिये संकट की घड़ी में वह प्रायः बाइबिल से उद्वरण देता था। उसकी मानसिक कार्यशैली को समझने के लिये मेरे पास उद्धृत करने हेतु दो अन्य उदाहरण हैं।
गोलमेज सम्म्लेन के दौरान उसने जनता से कहा था ‘‘मैं दलित वर्गों के प्रतिनिधियों के द्वारा प्रस्तुत माँगों के विरुद्ध कोई आपत्ति नहीं उठाऊँगा।’’ लेकिन जैसे ही दलित वर्गों के प्रतिनिधियों ने अपनी माँगे रखी, गाँधी अपने स्वयं द्वारा दिये गये आश्वासन को बिल्कुल भूल गये। मैं इसे दलित वर्गों के साथ विश्वासघात करना कहूँगा। वह मुसलमानों के पास गये एवं उन्हें कहा कि वह उनकी 14 माँगों का समर्थन करेंगे, यदि वे बदले में दलित वर्गों के प्रतिनिधियों द्वारा रखी गई माँगों का विरोध करें। एक दुष्ट व्यक्ति ने भी ऐसा नहीं किया होगा। यह तो गाँधी के विश्वासघात का एक उदाहरण है।
नेहरू कमेटी की रिपोर्ट कांग्रेस के खुले सत्र में चर्चा हेतु प्रस्तुत की गई थी। रिपोर्ट में कुछ संशोधन किये जाने थे। आप सभी इस संबंध में अवश्य जानते होंगे। इन संशोधनों का विरोध करने के लिए श्री गाँधी ने श्री जयकर को भाड़े पर लिया था। इन संशोधनों का श्री जयकर एवं उसके समर्थकों द्वारा जोरदार ढंग से विरोध किया गया था। उनसे सच्चाई के संबंध में प्रश्न करने का कोई कारण नहीं है। इसकी जानकारी कई लोगों को है। लेकिन ये संशोधन क्या थे एवं इसका इतना प्रबल विरोध क्यों किया गया? इन संशोधनों की पृष्ठभूमि के बारे में बहुत से लोग नहीं जानते। मुझे जयकर के विरोध के बारे में पता चला। यह सत्य है कि मेरे पास जिन लोगों ने